Published On: Sun, Sep 28th, 2014

ऐन्टीबॉयोटिक्स दवाएँ न लिखें डाक्टरः आईएमए

[ A+ ] /[ A- ]


नई दिल्ली। देश में ऐंटीबॉयोटिक्स का धड़ल्ले से बढ़ रहे इस्तेमाल पर चिन्ता जताते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक नया अभियान शुरू किया है। एसोशियन ने देशभर के डॉक्टरों से कहा है कि वे सर्दी-जुकाम और बुखार में दवाइयाँ देना बंद कर दें। दरअसल इन दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से ड्रग रेसिस्टेंस बढ़ता जा रहा है और दवाइयों का असर घटता जा रहा है।

RH-IMAसंस्था के महासचिव डॉक्टर नरेन्द्र सैनी ने कहा कि पिछले दो दशकों में किसी भी नये एंटीबॉयोटिक की खोज नहीं हुई है और बैक्टीरिया आम इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के असर से मुक्त है। यानी अब उस पर इन दवाइयों का असर नहीं पड़ता। हालात बिगड़ते जा रहे हैं और एक ऐसा दिन भी आएगा कि साधारण-सा इंफेक्शन भी खतरनाक हो जाएगा।

आईएमए ने घोषणा की है कि लोगों में जागरूकता लाने के लिए जनरैली तथा लेक्चर का आयोजन किया जाएगा। ताकि लोगों में जागृति पैदा हो और वे दवाओं के इस्तेमाल से बचें। आईएमए के सदस्य देश भर के ढाई लाख डॉक्टर हैं। एसोशियन ने बताया कि कई शोधों से पता चला है कि देश में इस तरह की दवाइयों की अंधाधुंध बिक्री हो रही है। उनके बारे में लोगों को कोई भी जानकारी नहीं है। वे नहीं जानते कि एंटीबायोटिक दवाओं का कैसे इस्तेमाल किया जाए। दुनिया में सबसे ज्यादा एंटीबॉयोटिक दवाएँ भारत में बिकती हैं, और उसके दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं। हालत यह है कि कई बड़ी बीमारियों में भी अब दवाइयाँ काम नहीं करती क्योंकि बैक्टीरिया इनकी आदी हो चुका है।

Subscribe to Republic Hind News


About the Author

-

Leave a comment

XHTML: You can use these html tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Copyright © 2012-18 Republic Hind News Network. All Rights Reserved.