Published On: Tue, Sep 30th, 2014

नेहरू और अग्निवेश ने भारत के झूठे इतिहास का प्रचार किया

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महेन्द्रपाल आर्य

हम भारतवासी बहुत पहले से सुनते आये हैं कि ‘पंडित’ कहलाने वाले जवाहरलाल नेहरु ने अपनी पुस्तक ‘भारत की खोज’ में यह लिखा है, कि ‘आर्य’ लोग बाहर से आये हैं। भारत के मूल निवासियों पर अत्याचार किया आदि। इसी के साथ कड़ी मिलाते हुए तथाकथित आर्य समाजी अग्निवेश ने अपनी वेवसाईट में भी यही दर्शाया है। वहां लिखा है कि आर्य लोग बाहर से आए, जो राहजनी, और व्यभिचारी थे, यहाँ के कोल भीलों पर अत्याचार किया। आगे लिखा है कि जो आर्य लोग उत्तर दिशा से भारत में आएं, पहले वाली सभ्यता जो अच्छी थी। आर्य लोगों ने उसे नष्ट किया। यहाँ आकर आग लगाई, लूटपाट किया तथा युवा महिलाओं से बलात्कार किया। यह लिखा है अग्निवेश डाटकाम में। ऐसा लगता है कि अग्निवेश ने मुसलमानों का पूरा कुकर्म आर्यों में सिर फोड़ दिया है। इसका प्रमाण एक पुस्तक, ‘मस्जिद से यज्ञ शाला की ओर’ में भी लिखा है।

RH-Nehru Agnivesh]इस मुद्दे को प्रकाश में इसलिए लाया जा रहा है, क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय अब यह प्रमाणित करने जा रही है कि ‘आर्य लोग इस देश के मूल निवासी हैं।’ इससे पहले कई भारतीय सनातनी संस्थाओं और विद्वानों ने भी आर्यों के मूल भारतीय होने के कई बार प्रमाण दे चुके हैं। आर्य लोग इसी देश के हैं, इस देश का नाम ही आर्यावर्त है। आदिकाल से हमारे यहाँ हर कर्म-कांड को करते कराते यही संकल्प दोहराया जाता है, “अर्यावार्तांतरगते।” यह अकाट्य प्रमाण है। यही सत्य है।

अब सवाल यह है कि भारत के मूल सत्य को प्रमाणित दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा कर दिया जाएगा। तब नेहरू के झूठे पुलिन्दे  भारत की खोज का क्या होगा? जिसमें पंडित कहलाने वाले नेहरू ने आर्यों को बाहर से आये लिखा है। आर्यों के सस्थाओं को पुलिसिया बल के सहारे कब्जा करने वाले वामपंथी अग्निवेश जिसने आर्यों को रहजन और व्यभिचारी बताया है अपने वेबसाईट में, का क्या होगा?

अग्निवेश अपने को आर्य कहलाते है, पैनल में बैठकर दयानन्द के विचारों को मानता हूँ कहते हैं। जिस दयानन्द ने ही आर्यों को इस देशका मूल निवासी माना है, उन्हीं आर्यों को विदेशी कहकर उनकी संस्था को कब्ज़ा करना यह कौन-सा आर्यों का काम है? कब्जा किये संस्थाओं में अपने चेलों को ही बैठा दिया तो छोड़ा क्या? अब दिल्ली विश्वविद्यालय आर्यों का सत्य प्रमाणति कर यह कह देगी कि आर्य इस देश के मूल निवासी हैं। फिर आर्यों के बहार से आने वाली बात जवाहरलाल नेहरू की हो, अथवा लाल वस्त्र धारी वामपंथी अग्निवेश की हो, इनके नंगा झूठ का प्रमाण सबको मिल जाएगा।

ऐसे शोधकर्तायों को साधुवाद और धन्यवाद देना चाहिए, जिन लोगों ने एक विवादित विषय की खोज कर उसके सत्य को उजागर किया है।

संपर्क 9810797056

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