Published On: Thu, Mar 26th, 2015

वेद में है गौशत्रुओं को मृत्युदण्ड का प्रावधान

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नई दिल्ली। वैदिक संस्कृति पर करीब 2000 सालों से हमला होते आ रहा है। भारत में ही बौद्ध सम्प्रदाय और जैन सम्प्रदाय ने भारत की सनातन वैदिक राजनीतिक व समाजिक व्यवस्था को नष्ट करने की हर कोशिश किया है। इसके बाद देश में विदेशी सम्प्रदाय जैसे ईसाई और इस्लाम के आने के बाद से जैसे वैदिक सनातन व्यवस्था को जड़ से खत्म करने की जबरदस्त साजिश की जा रही है।

इन्हीं साजिशों का नतीजा है कि सनातन का मुख्य आधार गौ-गंगा-गायत्री-गुरुकुल आज हमारे समाज से लुप्त होते जा रहे हैं। विशेषतौर पर देश की आजादी के बाद शिक्षा व्यवस्था पर इस्लाम और ईसाई पद्धति का छाप बनाए रखा गया और गाय जिसे वेदों में माता बताया गया है, उसे मारकर खाने का प्रावधान देश के तथाकथित विद्वानों ने साजिश के तहत प्रकाशित किया और देश के युवाओं को पढ़ाया।

इस वीडियों में देखें वैदिक विद्वानों ने वेद में गाय की महिमा पर क्या कहा हैः

जबकि ऋग्वेद के 8.10.15 में गाय को रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, आदित्यों की बहन, दूध का निवासस्थान, अपराधरहित एवं हीनताहीन बताया गया है, कहा गया है कि गाय का वध मत करो। यह बात बुद्धिमान और ज्ञानी इंसान से आह्वान किया गया है।

मंत्र 8.10.16 में गाय की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि गाय बोलने की शक्ति देने वाली, वचन उच्चारण करने वाली, सभी वचनों के साथ उपस्थित होने वाली, दीप्ति शालिनी एवं देवों के हित के लिए मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने वाली गाय का त्याग अल्प बुद्धि वाले लोग ही करते हैं।

10.68.3 में कहा गया है कि दूध देने वाली, नित्य गमनशील, स्पृहणीय, शोभन वर्ण वाली और प्रशंसनीयरूप से युक्त गायों को उनके दुश्मनों के चंगुल से बाहर निकालों, उनकी रक्षा करो।

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Displaying 1 Comments
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  1. Rajan Mishra says:

    yahi h hamara des k neta jo sahi batoo ko chupa deta h

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