Published On: Fri, Jun 19th, 2015

रमज़ान के मौके पर पढ़िए, क़ुरआन की ये ख़ास आयतें!

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यूँ तो जाने अनजाने में अमन चैन व शरीफ पसंद लोग रमजान का महीना बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। तारीख के पहले दिन तड़के पहला रोज़ा रखा जाता है और यह दौर एक महीने तक चलता है। गुरुवार 18 जून को चांद दिखने के साथ ही रमज़ान-उल-मुबारक का तथाकथित पवित्र महीना शुरू हो गया है। इसके साथ ही मस्जिदों से लेकर घरों तक में इबादत का दौर शुरू हो गया है।

RH-Ramadanइस्लामिक एक महीने में क़ुरआन पढ़ने की सलाह दी जाती है। रमजान के इस तथाकथित पवित्र महीने में आखिर क्यों क़ुरआन पढ़ने की गुजारिश की जाती है, क्या लिखा है क़ुरआन में, अल्लाह ने क्या आदेश उतारा है क़ुरआन के हवाले से। आईए गौर फरमाईए क़ुरआन के उन ख़ास आयतों पर जिसे अमल में लाकर इस्लामिक आबादी पूरे दुनिया में अमन चैन की बिगुल फूंक रहे हैं।

पाक शुरूआत, अरबी से उर्दू में अनुवाद करने वाले मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ाँ, उसके बाद उर्दू से हिन्दी अनुवाद करने वाले डॉ मुहम्मद अहमद की हिन्दी अनुवादित क़ुरआन में देखेंः

सूरा(2) आयत 67 में लिखा है- और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा, “निश्चय ही अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि एक गाय ज़ब्ह करो।” कहने लगे, ” क्या तुम हमसे परिहास करते हो?” उसने कहा, “मैं इससे अल्लाह को पनाह माँगता हूँ कि जाहिल बनूँ।” आगे आयत 68 में लिखा है- बोले, “हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमपर स्पष्ट कर दे कि वह (गाय) कौन-सी है?” उसने कहा, “वह कहता है कि वह ऐसी गाय है जो न बूढ़ी है, न बछिया, इनके बीच की रास है, तो जो तुम्हें हुक्म दिया जा रहा है, करो।”

आयत 69 में लिखा है- कहने लगे, “हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमें बता दे कि उसका रंग कैसा है?” कहा, “वह कहता है कि वह गाय सुनहरी है, गहरे चटकीले रंग की कि देखनेवालों को प्रसन्न कर देती है।” आयत 70 में लिखा है- बोले, “हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमें बता दे कि वह कौन-सी है, गायों का निर्धारण हमारे संदिग्ध हो रहा है। यदि अल्लाह ने चाहा तो हम अवश्य पता लगा लेंगे।” आयत 71 में लिखा है- उसने कहा, “वह कहता है कि वह ऐसी गाय है जो सधाई हुई नहीं है कि भूमि जोतती हो, और न वह खेत को पानी देती है, ठीक-ठीक है, उसमें किसी दूसरे रंग की मिलावट नहीं है।” बोले, “अब तुमने ठीक बात बताई है।” फिर उन्होंने उसे जब्ह किया, जबकि वे करना नहीं चाहते थे।

आयत 193 में लिखा है- ‘तुम उनसे लड़ो यहां तक कि फ़ितना शेष न रह जाए और धर्म अल्लाह के लिए हो जाए। अतः यदि वे बाज़ आ जाएं तो अत्याचारियों के अतिरिक्त किसी के विरुद्ध कोई कदम उठाना ठीक नहीं। आयत 194 में लिखा है- पवित्र महीना बराबर है पवित्र महीने के, और समस्त प्रतिष्ठाओं का भी बराबरी का बदला है। अतः जो तुमपर ज्यादती करे, तो जैसी ज्यादती वह तुमपर करे, तुम भी उसी प्रकार उससे ज्यादती का बदला लो। और अल्लाह का डर रखो और जान लो कि अल्लाह डर रखने वालों के साथ है।

आयत 218 में लिखा है- जो ईमान लाए और जिन्होंने अल्लाह के मार्ग में घर-बार छोड़ा और  जिहाद किया, वही अल्लाह की दयालुता की आशा रखते हैं। आयत 221 में लिखा है- मुशरिक(बहुदेववादी) स्त्रियों से विवाह न करो जब तक कि वे ईमान न लाएं। एक ईमानवाली बांदी(दासी), मुशरिक स्त्री से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितनी ही अच्छी क्यों न लगे। और न (ईमानवाली स्त्रियों का) मुशरिक पुरुषों से विवाह करो, जबतक कि वे ईमान न लाएं। एक ईमानवाला ग़ुलाम आज़ाद मुशरिक से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितना ही अच्छा क्यों न लगे।

आयत 223 में लिखा है- तुम्हारी स्त्रियाँ तुम्हारी खेती हैं। अतः जिस प्रकार चाहो तुम अपनी खेती में आओ और अपने लिए आगे भेजो, और अल्लाह से डरते रहो, और भली-भांति जान लो कि तुम्हें उससे मिलना है, और ईमान लानेवालों को शुभ-सूचना दे दो।

आयत 244 में लिखा है- अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो और जान लो कि अल्लाह सबकुछ सुननेवाला, जाननेवाला है।

अन्य ख़ास आयतें भाग 2 में पढ़िए…

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