बिहार फतह के लिए मोदी-केजरीवाल की रणनीति अपना रहे हैं लालू-नीतीश

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पटना। लोकसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक और घोर प्रतिद्वंदी नरेन्द्र मोदी से करारी हार मिलने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अक्टूबर-नवम्बर में होने जा रही बिहार विधानसभा चुनाव में मोदी की चुनाव प्रचार शैली का इस्तेमाल कर भाजपा को जबरदस्त शिकस्त देने की रणनीति बना रहे हैं। इसके लिए लोकसभा चुनाव में मोदी का चुनाव प्रचार करने वाले प्रशांत किशोर को अपने चुनाव प्रचार का जिम्मा सौंपा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा क्या जवाब ढ़ूढ़ती है।

लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने जिन उपकरणों का इस्तेमाल किया था, जिन शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिन व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। उन सभी का इस्तेमाल बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार बिहार से भाजपा को खत्म करने के लिए करने वाले हैं। नीतीश कुमार ने एक प्रेसवार्ता में कहा है कि उनके चुनाव प्रचार का काम प्रशांत किशोर ने शुरू भी कर दिया है।

RH-Bihar Election 2015नीतीश ने बताया है कि प्रशांत किशोर बिहार के ही हैं और इसीलिए उन्हें जदयू की प्रचार के लिए लाया गया है। उनके साथ आईआईटी और आईएमएम के कई स्नातक जुड़े हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान इस टीम ने एक यूनिट बनकर काम किया, लेकिन बिहार चुनाव के दौरान इस टीम को दो भागों में बांटा गया है। एक टीम बिहार सरकार की उपलब्धियों को प्रमोट करेगी तो दूसरी सोशल मीडिया पर कैंपेन संभालेगी।

नीतीश कुमार ने चुनाव का शंखनाद करते हुए कहा है कि केंद्र की राजग सरकार के 13 महीने के कार्यकाल में केवल अमीर अमीर हुए और गरीब गरीब हुआ। उन्होंने कहा कि मात्र 5 बड़े ऑद्योगिक घराने की संपत्ति में 65 हज़ार करोड़ की वृद्धि हुई जबकि शिक्षा लोन और कृषि लोन में भारी गिरावट आई है। नीतीश ने अपने दस साल के शासनकाल की चर्चा करते हुए कहा, ‘जो कहा है वो करके दिखाया है, आम लोगों की तरक्‍की हुई लेकिन बहुत कुछ करना बाकी है।’ नीतीश कुमार अपने शासन में किये कार्य पर ही बिहार की जनता से वोट मांगने जाएंगे।

‘चाय पे चर्चा’ की तर्ज पर ‘पर्चा पर चर्चा’

नीतीश कुमार ने भाजपा के लोकसभा चुनाव में ‘चाय पे चर्चा’ के तर्ज पर ‘परचा पर चर्चा’ कार्यक्रम चलाने का ऐलान किया है। इसकी विधिवत घोषणा करते हुए नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के हर कार्यकर्ता, विधायक और सांसद को 2 जुलाई से एक दिन में दस घरों में जाकर एक परचा, जिसमें चार सवाल होंगे, उसपर चर्चा करने के लिए अपील की। इस परचे में लोगों से पूछा जायेगा कि पिछले दस सालों में नीतीश कुमार के शासनकाल में उनके जिले में कुछ विकास हुआ या नहीं, नितीश कुमार के मुख्यमंत्री काल के बारे में उनका क्या फीडबैक है। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में कम से कम एक करोड़ घरों तक जाने का लक्ष्‍य रखा गया है।

इस अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं के मोबाइल फ़ोन में वो क्लिप भी लोड होगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाधन वापस लाने और हर खाते में 15 लाख जमा करने का वादा किया था और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, विशेष आर्थिक पैकेज और विशेष सहायता का वादा किया था। नीतीश ने कार्यर्ताओं से किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने के वादे को भी दिखाने की अपील की।

चुनाव तक पटना के बड़े होर्डिंगों पर नीतीश का कब्जा

राजधानी पटना के तमाम बड़े होर्डिंग को जदयू ने चुनाव तक के लिए बुक करा लिया है। जिसके कारण भाजपा चाह कर भी राजधानी में जोर-शोर  से अपना प्रचार नहीं कर पा रही हैं। यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर पटना पहुँचे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के स्वागत के लिए बैनर और होर्डिंग पर आफत आ गयी है। महीने पहले जब अमित शाह पटना आये थे तो पूरी राजधानी उनकी तस्वीरों और भगवा रंग में रंगा नजर आ रहा था। अमित शाह योग दिवस पर पटना में ही योग करेंगे लेकिन शहर में उनका पोस्टर-बैनर और होर्डिंग कहीं नहीं दिख रहा है।

पटना में होर्डिंग दिख रहे हैं तो सिर्फ नीतीश कुमार के, हर चौक-चौराहे का महत्वपूर्ण जगह नीतीश के नाम बुक है। इससे भाजपा गुस्से में है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी खर्चे से होर्डिंग्स लगाकर जगहों पर कब्जा कर रहें हैं, लोकतंत्र में ऐसी चीजें बहुत दिनों तक नहीं चलती। उन्होनें कहा कि ये उनके अंत की शुरुआत है। विनोद नारायण ने कहा कि जगह भले ही कब्जा कर लिए हों लेकिन भाजपा जनता के दिल में रहती है।

प्रचार के लिए ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल

नरेन्द मोदी के बाद दिल्ली फतह करने वाले अरविन्द केजरीवाल की भी नकल करते दिख रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। इन दिनों पटना की सड़कों पर दौड़ने वाली ऑॅटो रिक्शा पर भी सिर्फ और सिर्फ नीतीश ही नजर आ रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल की नकल कर नीतीश कुमार ने बिहार की जनता से माफी मांग कर दोबारा कुर्सी पर बैठे है। अब बिहार फतह के लिए नीतीश कुमार, केजरीवाल की सारी नीतियों को भी अपनाने की योजना बनाए बैठे हैं।

अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर चुनाव प्रचार को केंद्रित करने के पीछे तर्क भी दिए जा रहे हैं। इनसे जुड़े लोगों के मुताबिक, दिल्ली के चुनाव में यहां बसे बिहार के वोटरों ने केजरीवाल के पक्ष में ज्यादा वोट डाले थे। नीतीश की थिंक टैंक का मानना है कि बिहार में भी नीतीश को इसका फायदा मिल सकता है।

जदयू नेताओं के मुताबिक, इस बार चुनाव में महिलाएँ और नये वोटर निर्णायक होंगे। दोनों को मिलाकर राज्य में लगभग 8 फीसदी वोटर होंगे। ऐसे में पार्टी का मानना है कि बिना टेक्नॉलजी और इनोवेशन के प्रभावी कैंपेन नहीं किया जा सकता है और इन वोटरों तक पहुंचने के लिए कनेक्ट करने वाले आयोजन और प्रचार शैली की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में हर आयु वर्ग को टारगेट करने के लिए अलग-अलग शैली का चुनाव प्रचार देखे जा सकते हैं।

नीतीश कुमार ने पुणे से विशेष चुनावी वैन भी मंगवाई है जो तमाम सुविधाओं से लैस है। इस पर चढ़कर वह कहीं भी सभा या रैली संबोधित कर सकते हैं। ऐसी वैन पूरे देश में सिर्फ नरेन्द्र मोदी के पास थी, जो उन्होंने गुजरात में चुनाव अभियान में उसका उपयोग किया था। इसके अलावा सीधे लोगों से संवाद के लिए ‘चाय पर चर्चा’ जैसे फॉरमेट वाले कार्यक्रम भी होंगे। ऐसा मूल रूप से महिलाओं और युवाओं से बातचीत करने के लिए होगा। सूत्रों के मुताबिक, इसे गांवों में किया जाएगा और वहां पंचायत लगाकर कुछ लोगों से बातचीत की जा सकती है।

दिल्ली डायलॉग की तर्ज पर पंचायत कनेक्शन

नीतीश चुनाव प्रचार के तहत धुंआधार तरीके से पंचायतों का दौरा करेंगे। साथ ही उनकी पार्टी पंचायत कनेक्शन के तहत गांवों की जरूरतों के हिसाब से चुनावी घोषणा पत्र और उनके लिए वादे करेगी। इसे भी दिल्ली में केजरीवाल के दिल्ली डायलॉग की तर्ज पर आगे बढ़ाया जा सकता है। अरविन्द केजरीवाल की बड़ी जीत में दिल्ली डायलॉग का बड़ा हाथ था। इसी कार्यक्रम के बाद केजरीवाल ने दिल्ली की जीत के बीच अपनी खोई पैठ पाई। नीतीश को भी उम्मीद है कि पंचायत कनेक्शन से वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़कर अपने सुशासन के दावे को पहुंचा पाएंगे।

मोदी की चुनाव प्रचारक का इस्तेमाल

लोकसभा चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी के लिए ‘चाय पर चर्चा’ और ‘3डी होलोग्राम’ कैम्पेन जैसे कामकाज संभाल चुके प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए बड़े पैमाने पर चुनाव प्रचार की शुरुआत करने जा रहे हैं। प्रशांत की टीम अपना पहला बड़ा कैंपेन ‘जन भागीदारी अभियान’ के नाम से शुरू की है।

‘जन भागीदारी अभियान’ के तहत ‘बढ़ चला बिहार’ अभियान के जरिए चालीस हजार गांवों और चार करोड़ लोगों तक पहुंचने की कोशिश होगी। इसके लिए करीब 400 ट्रक तैयार किए जा रहे हैं जो टीवी, म्यूजिक सिस्टम, माइक्रोफोन और स्पीकर्स से लैस होंगे। ट्रक पर कैंपेन टीम का एक-एक व्‍यक्ति गांव-गांव जाकर सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित-प्रसारित करेगा।

हालांकि केंद्रीय चुनाव आयोग ने नीतीश सरकार के ‘बढ़ चला बिहार अभियान’ कार्यक्रम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। राज्य के अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आर लक्ष्मणन ने कहा कि आयोग का मानना है कि विधान परिषद की 24 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में शामिल मतदाता इस कार्यक्रम से प्रभावित हो सकते हैं। चूंकि विधान परिषद के लिए मतदान 7 जुलाई व मतगणना 10 जुलाई को होनी है, ऐसे में राज्य सरकार 10 जुलाई के बाद ही इस कार्यक्रम को शुरू कर सकती है।

ब्रेकफास्ट विद सीएम

कुछ और कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई है। इनमें ‘ब्रेकफास्ट विद सीएम’ और ‘बिहार विकास संवाद’ शामिल हैं। बिहार विकास संवाद का आयोजन मेट्रो सिटीज में किया जाएगा। इसमें इस बात का बखान किया जाएगा कि पिछले 10 साल में बिहार का कितना विकास हुआ। ‘जिज्ञासा’ नामक एक और कार्यक्रम प्लान किया गया है जिसे मोदी के लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए ‘मंथन’ कैंपेन की तर्ज पर विकसित किया गया है। इसमें मुख्य रूप से स्टूडेंट्स से चर्चा की जाएगी। ‘गौरव गोष्ठी’ के जरिए नीतीश सरकार 38 जिलों तक जाएगी और वहां जनता को अपने कामों का ब्योरा देगी।

बूथ मैपिंग का काम शुरू

कैंपेन टीम ने एक अलग टीम बनाई है जो बूथ मैंपिंग करेगी। यह काम शुरू कर दिया गया है। इसमें छह लाख बूथ्स की जानकारी एकत्रित की जाएगी। इसी स्ट्रेटजी के तहत जदयू नेताओं के भाषण के इनपुट्स भी प्रचार के लिए उपयोग किए जाएंगे। सिटीजन अलायंस नाम से बनी 35 सदस्यों की एक टीम बिहार सरकार की उपलब्धियों को प्रमोट करेगी। इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के नाम से बनी 27 सदस्यों की टीम डेटा एनालिसिस करेगी और नीतीश के सोशल मीडिया कैम्पेन को संभालेगी। प्रशांत की एक टीम पटना के 7 सर्कुलर रोड से काम कर रही है जहां नीतीश रहते हैं। दूसरी टीम 7 स्ट्रैंड रोड से काम कर रही है जो नीतीश के करीबी आरसीपी सिंह का आवास है।

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