Published On: Fri, Jan 6th, 2017

अंतरिक्ष में 103 उपग्रह भेज रहा है भारत, बौखला रहा है ब्रिटेन

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लंदन। भारत द्वारा शुरू किए महत्वाकाँक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम जिसके अंतर्गत श्रीहरिकोटा से 103 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, उनमें केवल 3 उपग्रह ही भारत के हैं। बाकी उपग्रह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित अन्य देशों के हैं। अगर यह लॉन्चिंग सफल रहती है, तो भारत एक बार में सबसे ज्यादा उपग्रह छोड़ने वाला देश बन जाएगा। इस कार्यक्रम के प्रकाश में आने के बाद से ही ब्रिटेन की मीडिया और कई ब्रिटिश सांसद काफी परेशान और नाराज हैं।

rh-isro-indiaभारत ने बुधवार को ऐलान किया था कि अपने रेकॉर्डतोड़ अंतरिक्ष मिशन शुरू करने जा रहा है। भारत की ओर से घोषणा की गई है कि वह बृहस्पति और शुक्र के लिए भी अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करेगा। भारत की इन योजनाओं से ब्रिटिश मीडिया में काफी नाराजगी और वहां भारत के खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है। ब्रिटिश मिडिया में छपी खबरों में कहा गया है कि भारत को ब्रिटेन की ओर से अरबों की सहायता राशि मिलती है। इन खबरों में भारत की इन अंतरिक्ष योजनाओं को निशाना बनाते हुए कहा है कि ब्रिटेन भारत को साढ़े 4 अरब की आर्थिक मदद देता है।

डेली मेल में छपी एक ख़बर में कहा गया है कि भारत एक और तो ब्रिटेन से सहायता राशि लेता है और दूसरी तरफ इतने महत्वकाँक्षी अंतरिक्ष मिशन को शुरू करने की शेखी भी बघारता है। इस खबर की भाषा काफी तल्ख है। मालूम हो कि अगले महीने 103 उपग्रहों को लेकर भारत का एक रॉकेट अंतरिक्ष के लिए रवाना होने वाला है। इसके साथ ही अंतरिक्ष मिशन के क्षेत्र में भारत दुनिया की सबसे अगली पंक्ति में शामिल हो जाएगा। ब्रिटिश अखबारों में भारत की इस उपलब्धि को लेकर काफी चिन्ता जाहिर की गई है।

लिखा गया है कि भारत जिन 103 उपग्रहों को रवाना करेगा, उनमें से ज्यादातर उपग्रह अन्य देशों के हैं। इन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के बदले भारत को इन देशों से काफी बड़ी रकम हासिल होगी। खबर में यह भी कहा गया है कि साल 2015 में ब्रिटेन ने विदेशों को जो 15 अरब 48 करोड़ की सहायता राशि दी, उसका ज्यादातर हिस्सा भारत के खाते में गया। खबर में आगे कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसके बावजूद करीब 5 अरब 84 करोड़ की सहायता राशि विभिन्न तरीकों से भारत में भेजी गई। खबर में बेहद तल्ख अंदाज में लिखा गया है कि ब्रिटेन की ओर से भारत को दी गई इस आर्थिक सहायता में वह रकम भी शामिल है, जो कि इतना पैसा किस तरह खर्च किया गया, यह योजनता बनाने में भारत की मदद करेगी।

भारत श्रीहरिकोटा से जिस रॉकेट द्वारा 103 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजेगा, उनमें केवल 3 उपग्रह ही भारत के हैं। बाकी उपग्रह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित अन्य देशों के हैं। अगर यह लॉन्चिंग सफल रहती है, तो भारत एक बार में सबसे ज्यादा उपग्रह छोड़ने वाला देश बन जाएगा। इससे पहले जून 2014 में रूस ने एक साथ 39 उपग्रह छोड़े थे। भारत की यह लॉन्चिंग अगर सफल रहती है, तो वह रूस को भी पीछे छोड़े देगा। इस खबर में इशरो के सहायक निदेशक एम नागेश्वर राव के हवाले से कहा गया है कि भारत अन्य ग्रहों पर मिशन भेजने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। इन ग्रहों में बृहस्पति और शुक्र शामिल है।

खबर में बताया गया है कि ब्रिटिश सासंद एंड्रयू रोजिनडेल ने कहा, “अगर भारत के पास रॉकेट्स के ऊपर खर्च करने के लिए पैसा है, तो हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि उन्हें आर्थिक मदद समझदारी है या नहीं।” एक अन्य सांसद पीटर बोन ने कहा, “दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा को देखते हुए मैं नहीं चाहता कि भारत को ब्रिटेन की ओर से और आर्थिक सहायता मिले।” जून 2016 में भारत ने एकसाथ 20 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े थे। मई 2016 में भारत ने अपना पहला मिनी स्पेस शटल लॉन्च किया था।

खबर में आगे कहा गया है कि ब्रिटेन दुनिया के उन 6 देशों में से है, जो कि अपने राष्ट्रीय आय का कुल 0.7 फीसद हिस्सा विदेशों को आर्थिक मदद देने में खर्च करते हैं। डेली मेल ने एक अभियान भी शुरू किया है, जिसमें पाठकों को बताया गया है कि भारत को ब्रिटेन की ओर से मदद के तौर पर जो रकम दी जा रही है, उससे कई सारी सामाजिक कल्याण की योजनाओं का पैसा जुटाया जा सकता है। कहा गया है कि भारत को दी जा रही है आर्थिक मदद के बराबर रकम से 1 करोड़ 80 लाख लोगों को गर्म खाना खिलाया जा सकता है। खबर में कहा गया है कि सरकार के पास फंड की कमी होने के कारण करीब 45 फीसदी काउंसिल्स ने 2010 से ही इस योजना में कमी कर दी है। पैसों की कमी के कारण 140 में से करीब 63 अथॉरिटीज ने यह योजना बंद कर दी है।

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