Published On: Wed, Aug 9th, 2017

क्या चेहरों पर मुहर लगाकर बाल विकास और बेटी बचाओ अभियान सफल करेगी भाजपा सरकार?

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भोपाल। भाई-बहनों का पर्व राखी के मौके पर जेल में बंद कैदियों से मुलाकात करने आए दो बच्चों के चेहरों पर कथित रूप से भोपाल जेल में मुहर (सील) लगाने का मामला देशभर में आग की तरह फैल गया है। जेल अधिकारियों का यह करतूत मानवता पर काला धब्बा तो है ही साथ ही बाल सुरक्षा और मोदी सरकार की बेटी बचाव मुहिम पर भी कलंक है। इस मामले में मानवाधिकार आयोग के नोटिस देने के बाद सरकार सक्रिय हो गई है। मध्यप्रदेश की जेल मंत्री कुसुम सिंह महदेले ने बयान दिया है कि केंद्रीय जेल कैदियो के बच्चों के मुंह पर सील लगाने के मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

कुसुम मेहदेले ने कहा है कि दोष सिद्ध होने पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। राखी पर्व के दिन भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद परिजनों से मिलने गए बच्चों के गालों पर जेल प्रशासन ने मुहर लगा दी थी। यह मुहर आम तौर पर जेल में कैदियों से मिलने के लिए आने वाले लोगों के हाथ पर प्रवेश के दौरान लगाई जाती है। हालांकि, जेल प्रशासन का कहना है कि यह मुहर जान-बूझकर उनके गालों पर नहीं लगाई गई थी। गलती से हाथ पर लगने की बजाय गाल पर लग गई होगी।

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक किशोरी सहित दो बच्चों के चेहरों पर मुहर लगाने के मामले में मंगलवार को संज्ञान लिया। आयोग ने जेल महानिदेशक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा। आयोग ने मीडिया में दोनों बच्चों के चेहरों पर मुहर लगी तस्वीर आने के बाद यह कार्रवाई की है।

भोपाल केन्द्रीय जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे ने बताया, “राखी के दिन जेल में कैदियों से मिलने के लिए तकरीबन 8,500 मुलाकाती आते हैं। कुछ महिलाएं एवं लड़कियां बुर्का पहनकर आती हैं। इसलिए गलती से मुहर हाथ की बजाय गाल पर लग गई होगी। ऐसा लगता है कि यह जान-बूझकर नहीं लगाई गई है।” अधीक्षक ने कहा कि दरअसल, जेल में परिजनों को कैदियों से मिलने से पहले पहचान चिन्ह के लिए इस तरह की मुहर हाथ पर लगाई जाती है, ताकि कोई कैदी भीड़ का फायदा उठाकर बाहर न निकल जाए। शरीर के अन्य अंगों की बजाय इस मुहर को हाथ पर इसलिए लगाते हैं, ताकि इसे बाद में आसानी से पानी से धोकर साफ किया जा सके।

जेल अधीक्षक ने का कहना है कि यदि भीड़ में एक के चेहरे पर गलती से मुहर लग गई हो, तो किसी पर क्या कार्रवाई करें। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि पता चलेगा कि किसी ने जान-बूझकर चेहरे पर मुहर लगाई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बहरहाल, पूरे मामले और जेल अधीक्षक के बातों से साफ है कि जिसने बच्चों के चेहरे पर मुहर लगाया है वह नहीं पकड़ा जाएगा और अगर पकड़ा जाता भी है तो भूल बताकर मामला दबा दिया जाएगा। आम लोगों के साथ प्रशासन का इस तरह का रवैया यह पहली दफा नहीं है। प्रशासन अक्सर अपने अपराध को गलती बताकर साफ निकल जाता है और उसी अपराध के लिए आम जनता को कठोर सजा देने में न्यायालय के जज भी संकोच नहीं करते हैं। फिलहाल अब देखना यह है कि ऐसे मामले कब और किस रूप में पुनः सामने आते हैं।

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