Published On: Wed, Aug 9th, 2017

तिब्बत में युद्ध हुआ तो चीनी वायुसेना पर जीत हासिल कर लेगा भारतीय वायु सेना

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नई दिल्‍ली। भारतीय थिंक टैंक का कहना है कि यदि चीन भारत पर आक्रमण करता है तो चीन को तिब्बत क्षेत्र में समेत लेना चाहिए। भारत के यु्द्ध रणनीतिकारों का मानना है कि तिब्बत में भारत और चीन के टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है तो भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान, चीनी लड़ाकू विमान पर भारी पड़ेंगे। भारतीय वायुसेना जलवायु का फायदा उठाते हुए चीनी वायुसेना से अधिक और प्रभावी रूप से सक्षम है। शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रहे दस्‍तावेज ‘The Dragon’s Claws: Assessing China’s PLAAF Today’ में इस बात के संकेत मिलते हैं। इसके मुताबिक तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र में ऑपरेशन के लिहाज से भारतीय वायुसेना को चीन की तुलना में बढ़त हासिल है। भारत और चीन के बीच स्थित वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के उत्‍तर में तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र पड़ता है।

इस दस्तावेज को स्‍क्‍वाड्रन लीडर समीर जोशी ने तैयार किया है। जोशी मिराज 2000 के पूर्व फायटर पायलट रहे हैं। पिछले कुछ समय से सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच आकाश में शक्ति संतुलन के आकलन के लिहाज से यह अपनी तरह का समग्र रूप से पहला युद्ध रणनीति पर आधारित भारतीय दस्‍तावेज है।

स्‍क्‍वाड्रन लीडर समीर जोशी के मुताबिक, ‘क्षेत्र, टेक्‍नोलॉजी और ट्रेनिंग के लिहाज से तिब्‍बत और दक्षिणी जिनजियांग में भारतीय वायुसेना को PLAAF(पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स) पर निश्चित रूप से बढ़त हासिल है। यह संख्‍याबल के लिहाज से PLAAF की बढ़त को कम से कम आने वाले कुछ सालों तक रोकने में सक्षम है।’

इसकी वजह मोटेतौर पर यह बताई गई है कि चीन के मुख्‍य एयरबेस बेहद ऊंचाई पर स्थित हैं। दूसरी तरफ तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र में आने वाले चीनी एयरक्राफ्ट को बेहद विपरीत जलवायु दशाओं का भी सामना करना पड़ता है। इससे चीनी एयरक्राफ्ट की प्रभावी पेलोड क्षमता और सैन्‍य अभियान की क्षमता में काफी कमी आ जाती है। मतलब यह कि तिब्‍बत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वायु का लघु घनत्‍व चीनी लड़ाकू विमानों मसलन su-27, J-11 अथवा J-10 की क्षमता को कमजोर कर देता है।

वहीं दूसरी तरफ भारतीय वायुसेना उत्‍तर पूर्व के बेसों तेजपुर, कलाईकुंडा, छाबुआ और हाशीमारा से संचालित करते हैं। इन बेसों की ऊंचाई मैदानी इलाकों की समुद्र तल से ऊंचाई के करीब है। लिहाजा भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान तिब्‍बत स्‍वायत्‍त क्षेत्र में काफी भीतर तक आसानी से प्रभावी तरीके से ऑपरेशन करने में सक्षम हैं।

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