Published On: Wed, Aug 9th, 2017

जिंदा लोगों की हिफाजत के लिए कोई किताब है तो वह संविधान हैः शरद यादव

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नई दिल्ली। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर संसद में शरद यादव ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरे दादा-परदादा आजादी की लड़ाई में शामिल थे। आजादी की लड़ाई के लिए झांसी की रानी, मंगल पाण्डेय और भगत सिंह समेत कईयों ने आहूति दी। कितने ही लोग बलिदान हो गए। ये लड़ाई साझा है। अगर देश साझा विरासत को याद नहीं रखेगा तो कई तरह के भम्र में पड़ा रहेगा। इतिहास की गवाही बुनियाद होती है।

जदयू नेता ने कहा कि जो मुल्क इतिहास के साथ छेड़खानी करता है, वह पूरी कौम के साथ छेड़खानी होती है। विचारों में भिन्नता होती है। नहीं होगी तो फिर लोकतंत्र किस काम का। महात्मा गांधी ने कहा था कि लोकतंत्र गोली से नहीं बोली से चलेगा। शरद यादव ने कहा, “जिंदा लोगों की हिफाजत के लिए कोई किताब है तो वह संविधान है।”

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