Published On: Mon, Apr 2nd, 2018

बीजेपी सांसदों ने फेरा प्रधानमंत्री मोदी की सपनों पर पानी

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नई दिल्ली। दिल्ली में सातों संसदीय सीटों पर बीजेपी का कब्जा है लेकिन एक भी सांसद ने अपने प्रधानमंत्री के सपनों को पूरा नहीं किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के सभी सांसदों को मात्र तीन गाँवों में बुनियादी और संस्थागत ढाँचा विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन गत चार सालों में एक भी गाँव में ढेलेभर का काम नहीं किया गया है। जबकि सांसदों को एक आदर्श गाँव 2016 तक विकसित करना था।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2014 को महात्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत प्रत्येक सांसद को 2019 तक तीन गांवों में बुनियादी और संस्थागत ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बीजेपी के सातों सांसद क्रमशः नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी, चाँदनी चौक से हर्षवर्धन, पश्चिमी उत्तरी दिल्ली से उदित राज, पश्चिमी दिल्ली से परवेश वर्मा, पूर्वी दिल्ली से महेश गिरी, दक्षिणी दिल्ली से रमेश बिधूड़ी और उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी समेत जिसने भी आदर्श गाँव के तहत गाँवों को गोद लिया है। उन सभी गाँवों में बुनियादी सुविधाएं स्थापित करने के बजाए इन सांसदों ने अपनी विशेष सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया है।

इतना ही नहीं, चार वर्षों के बाद भी गोद लिए गाँवों में रोजगार, चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में ऊँट के मुँह में जीरे बराबर भी कार्य नहीं हुए। वहीं, इन गाँवों में अपराध और नशीलों पदार्थों की ब्रिकी में तेजी से इजाफा हुई है। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चहेते सांसद हर्षवर्धन को तीन मंत्रालय दे रखे हैं। लेकिन ये सांसद महोदय पेशे डॉक्टर होने के बावजूद न ही मंत्रालयों में ठेले भर का काम किया है, न ही प्रधानमंत्री मोदी की महत्वकाँक्षी गोद लिए गाँवों में। इन सांसदों ने अपनी धूर्तता का ऐसा प्रदर्शन किया है कि अपने प्रधानमंत्री को भी झाँसा देने में शर्म को आगे नहीं आने दिया।

प्रधानमंत्री के आहवान पर सांसदों ने गाँव तो अवश्य गोद लिया है, लेकिन इन्होंने ऐसे गाँव चुना है, जहाँ पर इन्हें कार्य न करने और कार्य न होने के हजारों बहाने आसानी से मिल जाते हैं। मजे की बात है कि इन सातों सांसदों को नरेन्द्र मोदी ने अपने पसंद को ध्यान में रखकर इन्हें सांसद का टिकट दिया था। लेकिन इन लोगों ने अपने प्रधानमंत्री को चुना लगा दिया है।

यही हाल देश के लगभग 80 फीसदी सांसदों की भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक छोटा-सा अपील को लगभग सभी सांसदों ने नजरअंदाज-सा कर दिया है। ऐसा लगता है कि जैसे नरेन्द्र मोदी को इन सांसदों ने आजतक अपना प्रधानमंत्री स्वीकार ही नहीं किया है?

ख़ैर ये तो पार्टी की अंदरूनी राजनीति है। देशहित की बातों पर गौर करें तो प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से मई 2019 तक सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 3 गांवों विकसित करने की अपील की थी। एक दैनिक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अबतक मात्र 19 फीसदी सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीन गांवों को चुना है। 88 फीसदी सांसदों ने एक गांव को गोद लिए हैं, जबकि 59 फीसदी सांसदों ने दो गांवों को इस योजना के तहत चुना है। रिपोर्ट के मुताबिक अबतक 1314 गांवों को चिन्हित किया गया है। यहां पर 42 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। वो भी सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय के कागजों में नजर आते हैं जमीन पर कुछ भी नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री की महत्वकाँक्षी योजना के कार्यान्वयन में हो रही देरी को देखते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य के मुख्यमंत्रियों और सांसदों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह जल्द विकास के लिए गांवों को चिन्हित करें और प्रधानमंत्री मोदी के टारगेट को हासिल करें। फिलहाल यह कहना जल्दीबाजी न होगा अगर टारगेट हासिल नहीं हो सका तो जाहिर है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह नरेन्द्र मोदी की ट्रैक रिकॉर्ड खराब हो जाएगी।

एक ओर जहाँ विपक्षी दलों के सांसदों ने इस योजना में शुरू से ही रूचि नहीं दिखाई है वहीं बीजेपी के सांसद भी पीएम के इस महात्वाकांक्षी काम में पिछड़ रहे हैं। 191 बीजेपी सांसदों ने अबतक इस योजना के तहत तीसरे गांव का चयन तक नहीं किया है। जबकि 84 सांसदों ने दूसरे गांव का चयन नहीं किया है। इसी तरह राज्यसभा के मात्र 12 बीजेपी सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीनों गांवों को विकास के लिए चुना है। जबकि 20 सांसदों ने अबतक दूसरे गांव का चयन नहीं किया है। हालांकि सभी बीजेपी सांसदों ने कम से कम एक गांव का चयन जरूर कर लिया है। बता दें कि इस योजना के तहत संसद निधि कोष से गोद लिए गांवों में विकासकार्य करना है, अलग से कोई विशेष फंड सांसदों को नहीं दिया गया है। सांसदों से अपेक्षा की गई है कि वह अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर केंद्र की योजनाओं को इन गांवों में ठीक तरीके से लागू करवाएं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि सांसदों को पत्र लिखकर इस काम को जल्द पूरा करने को कहा जा रहा है। लेकिन सांसद इसके लिए राजनीतिक बहाना का सहारा लेते हुए कहना शुरू कर दिया है कि एक गांव को चुनने से दूसरे गांव के लोगों की नाराज होने की संभावना है।

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