Published On: Sun, Apr 8th, 2018

चीन और अमेरिका के बीच शुरू हो गया है व्यापार युद्ध, भारत को होगा फायदा

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नई दिल्ली। अपने व्यापार को बचाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से शुरू की गई नई ‘जंग’ (ट्रेड वॉर) और गहरा गई है। वहीं चीन ने भी अब अमेरिका के खिलाफ ट्रेड वॉर छेड़ दी है। लेकिन इस जंग ने दुनियाभर के लोगों को टेंशन में डाल दिया है। हालांकि भारत को इन दोनों की यह जंग फायदा पहुँचा सकता है।

दुनिया में पैदा होने वाली कई कमोडिटीज का चीन सबसे बड़ा कंज्यूमर है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिका कई कमोडिटीज का या तो सबसे बड़ा उत्पादक है या फिर सबसे बड़ा निर्यातक। चीन और अमेरिका में खपत होने वाली कई कमोडिटीज का भारत भी बढ़ा उत्पादक है, ऐसे में इन दोनों देशों के बीच जैसे-जैसे व्यापार युद्ध भीषण होगा। वैसे-वैसे इसका फायदा भारत को पहुंचेगा।

चीन, अमेरिका और भारत का व्यापार

चीन दुनियाभर में सोयाबीन, चावल और कपास की सबसे ज्यादा खपत करता है, अमेरिका सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ कपास का सबसे बड़ा निर्यातक है और चावल निर्यात में भी उसका बड़ा हिस्सा है। वहीं भारत दुनियाभर में कपास का सबसे बड़ा और चावल का दूसरा बड़ा उत्पादक है, साथ में भारतीय सोयाबीन उद्योग अपने सोयाबीन उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए चीन का दरवाजा खुलता हुआ देखना चाह रहा है।

भारत के कपास उद्योग और किसान को हो सकता है फायदा

भारत की कपास इंडस्ट्री का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच अगर खींचतान बढ़ती है तो इससे भारतीय कपास उद्योग के साथ कपास किसानों को लाभ पहुंच सकता है। देश में कपास उद्योग के संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट अतुल गनात्रा ने बताया है कि चीन और अमेरिका में ट्रेड वार से भारतीय कपास निर्यात में इजाफा हो सकता है। उन्होंने बताया कि ट्रेड वार बढ़ा और चीन ने अमेरिका से कपास आयात को लेकर कुछ लगाम लगाई तो भारत से चीन को कपास का निर्यात मौजूदा 5-7 लाख गांठ (170 किलो) सालाना से बढ़कर 25-30 लाख गांठ तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि खींचतान ज्यादा बढ़ी तो अमेरिका भी चीन में बनने वाले रेडिमेड कपड़ों के आयात को कम करने के लिए कदम उठा सकता है और इसका फायदा भी भारत को ही होगा।

देश के सोयाबीन उद्योग को हो सकता है फायदा

अमेरिका सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है और चीन सबसे बड़ा उपभोक्ता। चीन अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए सालभर में लगभग 8 करोड़ टन सोयाबीन का आयात करता है जिसका बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है। दोनो देश सोयाबीन को लेकर एक दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, अगर दोनो देशों के बीच ट्रेड वार की खींचतान बढ़ती है यहां भी भारत को फायदा पहुंचने की उम्मीद बढ़ जाती है। भारत में हालांकि सोयाबीन का इतना ज्यादा उत्पादन नही होता कि चीन की खपत को पूरा कर सके, लेकिन भारत में सोयाबीन से बनने वाले सोयामील को चीन में अच्छा बाजार मिल सकता है।

देश में सोयाबीन इंडस्ट्री के संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन यानी सोपा के चेयरमैन डेविस जैन के मुताबिक इस बात की संभावना कम है कि चीन और अमेरिका सोयाबीन को लेकर किसी तरह का कदम उठाएंगे। क्योंकि सोयाबीन को लेकर दोनो ही देश एक दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, लेकिन ऐसा अगर होता है तो भारतीय सोयाबीन उद्योग और सोयाबीन किसानों के लिए यह बहुत बड़ा फायदे वाला मौका हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि चीन ने फिलहाल भारत से सोयामील आयात पर रोक लगा रखी है।

चीन है चावल का सबसे बड़ा उपभोक्ता

चीन दुनिया में चावल का सबसे बड़ा आयातक और कंज्यूमर है, वहीं भारत सबसे बड़ा निर्यातक है और अमेरिका भी चावल का बड़ा निर्यातक है। देश में चावल निर्यातकों के संगठन ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) के कार्यकारी निदेशक राजन सुंदरेशन ने बताया कि चीन भले ही चावल का सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता हो लेकिन वह भारत से आयात नहीं करता और अमेरिका से भी चीन को चावल का निर्यात नहीं होता। ऐसे में दोनो देशों के बीच अगर ट्रेड वार बढ़ता है तो इससे भारतीय चावल मार्केट पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिका के खिलाफ एकजुट रूस और चीन

अमेरिका और चीन जहां ट्रेड वॉर पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने पर आमादा हैं, वहीं इस युद्ध में चीन और रूस एक साथ हैं। अगर कुछ साल पीछे जाएं, तो रूस और चीन के संबंध कुछ ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन अमेरिका जैसी ताकत को चुनौती देने के लिए रूस और चीन एकजुट हो गए हैं। कई मुद्दों पर रूस और चीन अमेरिका के खिलाफ खड़े हैं, जिनमें ट्रेड वॉर से लेकर आर्थिक प्रतिबंध, सीरिया और उत्तर कोरिया जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि अब पिछले कुछ सालों में चीन और रूस के बीच घनिष्ठता बढ़ी है। दोनों देश आपसी संबंधों और व्यापारिक रिश्तों को सुधारने की पूरी कोशिशों में हैं और ट्रेड वॉर में भी वे अमेरिका के खिलाफ एकजुट खड़े हैं।

‘ट्रेड वॉर दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक’

अमेरिका रूस और चीन की घनिष्ठता से चिंतित नहीं है, लेकिन उस पर अपने व्यापार को बचाने का जुनून इस कदर सवार है कि वह इससे इकॉनमी पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस ट्रेड वॉर से दुनिया की इकॉनमी पर बुरा असर पड़ेगा।

चीन पर टैरिफ क्यों लगा रहा है अमेरिका?

अमेरिका ने अब तक कई बार चीन पर टैरिफ लगाया है। अमेरिका का तर्क है कि चीन गैर-कानूनी तरीके से व्यापार करता है और उसकी इन गतिविधियों ने अमेरिका की हजारों फैक्ट्रियों और लोगों की नौकरियां छीन ली हैं। ऐसे में अपने व्यापार को बचाने के लिए उसे यह सही कदम लगता है।

गुरुवार को ट्रंप प्रशासन ने चीन को धमकी देते हुए कहा कि अगर चीन ने व्यापार करने के अपने तरीकों में बदलाव नहीं किया तो वह उस पर 100 अरब डॉलर (6500 करोड़) का टैरिफ लगा देगा। वहीं इससे पहले बुधवार को चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 50 अरब डॉलर मूल्य के 106 अमेरिकी उत्पादों के आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया। मार्च 2018 में ट्रंप ने चीन से आयात पर 60 अरब डॉलर यानी 3910 अरब रुपये का टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इससे बौखलाए चीन ने भी उन अमेरिकी उत्पादों की लिस्ट जारी की, जिनपर वह भारी-भरकम आयात शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। इस लिस्ट में पोर्क, सेब और स्टील पाइप शामिल हैं।

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