Published On: Mon, Apr 9th, 2018

रूस, चीन और पाकिस्तान की रणनीति के तहत अफगानिस्तान तक किया जा रहा है CPEC का विस्तार

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पेइचिंग। मालदीव, श्रीलंका और नेपाल जैसे भारत के पड़ोसी मित्र देशों में चीन लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इस कड़ी में अब वह भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले अफगानिस्तान को अपनी उस परियोजना में शामिल करने जा रहा है, जिसका नई दिल्ली विरोध करती आई है। चीन की महत्वाकांक्षी और विवादित बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव (BRI) के फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट CPEC (चीन-पाक आर्थिक गलियारा) का विस्तार अफगानिस्तान तक किया जा रहा है। यह जानकारी रविवार को एक रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि BRI ने एशिया के आर्थिक सहयोग में ‘नयी ऊर्जा’ दी है और महाद्वीप को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को फिर से आकार देने में सहयोग किया है। यह जानकारी चीन के बोआवो फोरम फॉर एशिया (BFA) के वार्षिक सम्मेलन के इतर रविवार को पेइचिंग में जारी एशियन कॉम्पिटिटिवनेस एनुअल रिपोर्ट 2018 में दी गई है। चीन ने दिसंबर में 50 अरब डॉलर की लागत से बनने वाली CPEC परियोजना का विस्तार अफगानिस्तान तक करने की घोषणा की थी, जिस पर भारत ने चिंता जताई थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक में सीपीईसी का विस्तार अफगानिस्तान तक करने की पेशकश की थी।

वांग ने विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक में कहा, ‘चीन और पाकिस्तान अफगानिस्तान की तरफ उम्मीद भरी निगाह से देख रहे हैं, जिसका आधार आपसी लाभ का सिद्धांत है, जिसमें सभी पक्षों के फायदे हैं। CPEC का अफगानिस्तान तक विस्तार इसके लिए मुफीद साधन है।’ बता दें कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच की तर्ज पर चीन ने 2001 में BFA की स्थापना की थी और इसकी हर साल बैठक होती है। इस साल इस फोरम की बैठक रविवार को हैनान प्रांत के तटीय शहर बोआवो में शुरू हुई है जो 11 अप्रैल तक चलेगी। इस बैठक को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी संबोधित कर सकते हैं।

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव के तहत फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट CPEC से न सिर्फ लोकल इन्फ्रस्ट्रक्चर का सुधार हुआ है बल्कि इसका अफगानिस्तान की तरफ विस्तार किया जा रहा है। इससे आतंकवाद की मुख्य वजह रही गरीबी में कमी आ रही है और स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहतर हो रही है।’ शी चिनफिंग का महत्वाकांक्षी और अरबों डॉलर वाला BRI प्रॉजेक्ट भारत-चीन संबंधों में बड़ी बाधा बन चुका है क्योंकि CPEC को BRI के ‘फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट’ के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है। भारत ने चीन के सामने CPEC को लेकर सख्त विरोध दर्ज कराया है, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजर रहा है।

BRI को लेकर भारत की चिंताओं को जाहिर करते हुए चीन में भारत के राजदूत गौतम बम्बावले ने हाल ही में हॉन्ग कॉन्ग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा था, ‘जब हम डिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट्स या कनेक्टिविटी प्रॉजेक्ट्स की बात करते हैं तो वह पारदर्शी, साफ-साफ और समानता वाली होनी चाहिए। ऐसे प्रॉजेक्ट्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य कुछ निश्चित मानक होने चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रॉजेक्ट इन मानकों पर खरा उतरता है तो हम खुशी से उसका हिस्सा बनेंगे। भारतीय राजदूत ने कहा था, ‘एक मानक यह है कि प्रॉजेक्ट ऐसा हो जो किसी देश की संप्रभुता का उल्लंघन न करता हो। दुर्भाग्य से CPEC जैसी चीज मौजूद है, जिसे BRI का फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट कहा जा रहा है, वह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, इसलिए हम उसका विरोध करते हैं।’

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