Published On: Mon, Apr 9th, 2018

आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के शक पर चीन ने 50 उइगुर महिलाओं को किया कैद

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गिलगित। हाल ही में चीन ने शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यक उइगुर समुदाय की 50 महिलाओं को कथित तौर पर कैद कर लिया। जिसके बाद पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में चीनियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने महिलाओं को तुरंत रिहा कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने मांग की कि चीन के खिलाफ एक साल का ट्रेड बैन लगाया जाए।

दरअसल गिलगित-बाल्टिस्तान और शिनजियांग प्रांत के बीच गहरा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ता है, जो सदियों पुराना है। उइगुर समुदाय की कई महिलाओं ने कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान के पुरुषों से शादी की है। दोनों इलाकों के लोगों के बीच दशकों से शादियां होती रही हैं। कहा जा रहा है कि इन महिलाओं को चीन ने इसलिए कैद किया है क्योंकि उसे शक था कि ये महिलाएं आतंकी गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं।

यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह उइगुर समुदाय पर जुल्म ढाया हो, बल्कि इस अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार करने के आरोप चीन पर हमेशा से लगते रहे हैं। इससे पहले 2017 में चीन ने शिनजियांग प्रांत में रहनेवाले उइगुर समुदाय के हजारों लोगों को हिरासत में लेकर उन्हें खास तरह के शिविरों में भेज दिया था, ताकि उनकी ‘चरमपंथी सोच’ को बदला जा सके।

चीन के साथ व्यापार बैन की मांग

गिलगित में हाल ही में एक ऑल पार्टी कॉन्फ़्रेंस आयोजित की कई, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन के बढ़ते अतिक्रमण पर बात की गई। साथ ही इस कॉन्फ़्रेंस में आतंकवाद के झूठे आरोपों के चलते फंसाई गईं महिलाओं को तत्काल छुड़ाने की मांग की गई। इतना ही नहीं, इस मीटिंग में चीन के साथ व्यापार पर एक साल तक प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई। एक स्थानीय नेता ने बताया कि पाकिस्तान ने इसलिए उइगुर समुदाय की 50 महिलाओं को तत्काल छुड़ाने की मांग चीन की सरकार से की है ताकि दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंध बने रहें।

महिलाओं पर चीन की सख्ती ज्यादा?

चीनी संप्रभुता से समझौता न हो, इसलिए पेइचिंग ने चीनी क्षेत्र में रह रही महिलाओं से शादी करने वाले पाकिस्तानी पुरुषों के लिए सख्त कानून बनाए थे, लेकिन ढोंगी रूप दिखाते हुए चीन ने विवाहित महिलाओं पर ही सख्ती दिखा दी, वह भी तब जब उन्होंने कानून का पालन करते हुए पाकिस्तानी पुरुषों से शादी की। चीन ने शिनजियांग प्रांत से उइगुर समुदाय के लोगों को हटाने के लिए सुनियोजित तरीकों का इस्तेमाल किया है। चीन ने पहले से ही पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान को अवैध तरीके से कब्जा रखा है और अब वहां घुसपैठ करने के लिए षडयंत्र पर षडयंत्र रच रहा है।

कौन हैं उइगर और चीन से क्यों है विवाद?

उइगर समुदाय चीन का अल्पसंख्यक समुदाय है, जो इस्लाम को मानता है और शिनजियांग प्रांत में रहता है। रिपोर्ट्स की मानें तो यह समुदाय एक ऐसी मूवमेंट चलाता है, जिसका लक्ष्य चीन से अलग होना है। पहले शिनजियांग का नाम पूर्वी तुर्कीस्तान था और यह चीन का हिस्सा नहीं था। हालांकि बाद में यह चीन का हिस्सा बन गया। इस इलाके की आजादी के लिए इन लोगों ने काफी संघर्ष किया, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। उइगरों का शिनजियांग में पहले अच्छा आकंड़ा था, लेकिन आज स्थिति उलट है।

पिछले साल (2017) में एपी की जांच में भी सामने आया था कि चीन में रह रहे 1 करोड़ उइगुरों को संदिग्ध आतंकवादियों के तौर पर देखा जाता है। इतना ही नहीं, जो उइगुर विदेशों में रह रहे अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं उन्हें पुलिस के सवालों का सामना करना पड़ सकता है या फिर कथित वोकेशनल सेंटर में जाना पड़ सकता है।

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