Published On: Mon, Apr 9th, 2018

अम्बाबाई मंदिर में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण के लिए महाराष्ट्र विधानसभा ने किया कानून पारित

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कोल्‍हापुर। महाराष्‍ट्र विधानसभा ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कोल्हापुर के महालक्ष्‍मी मंदिर में पुजारियों की पैतृक नियुक्ति को समाप्‍त कर दिया। यह मंदिर अंबाबाई के नाम से जाना जाता है। विधानसभा ने इस संबंध में एक कानून पारित किया है। इसके साथ ही मंदिर में महिलाओं की नियुक्ति में 50 फीसदी आरक्षण पर मुहर लगाई गई है। वहीं, पुजारी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। श्रीपूजक कहे जाने वाले इन पुजारियों का दावा है कि पुरोहित का कार्य एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होता है। इससे पहले पुजारियों ने देवी अंबाबाई को घाघरा-चोली पहना दिया था जिससे कई भक्‍त आहत हो गए थे और प्रगतिशील संगठनों ने पुजारियों को हटाने की मांग की थी।

महाराष्‍ट्र सरकार एक कमिटी का गठन करने जा रही है, जिसमें चेयरमैन के अलावा आठ सदस्‍य, एक डेप्‍युटी चेयरमैन और एक खजांची होंगे। ये लोग मंदिर से जुड़े रोजमर्रा के मामलों को देखेंगे। इसके अलावा मंदिर में राज्‍य सरकार पुजारी नियुक्‍त करेगी और उन्‍हें हर महीने तयशुदा वेतन मिलेगा। इस समिति को दान में मिली रकम को खर्च करने की छूट होगी। प्रगतिशील संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भक्‍त जो चीजें दान देते हैं उसे पिछले कई सालों से पुजारी चुरा लेते हैं। कानून राज्‍य मंत्री रंजीत पाटिल ने यह बिल विधानसभा में पेश किया। उन्‍होंने कहा, ‘हम पुजारियों की नियुक्ति के दौरान शैक्षिक योग्‍यता की सिफारिश पर विचार करने जा रहे हैं।’

उन्‍होंने कहा कि पुजारियों की नियुक्ति में हरेक जाति के लोगों को शामिल करने पर विचार किया जाएगा। पाटिल ने कहा कि शाहू महाराज द्वारा स्‍थापित वैदिक स्‍कूल का प्रबंधन गैर ब्राह्मण पुजारियों को दिया जाएगा और इसे मंदिर को मिले दान के जरिए संचालित किया जाएगा। सदस्‍यों ने यह भी सुझाव दिया है कि पुजारियों की नियुक्ति में आधी महिलाओं को जगह दी जाए। राज्‍य सरकार पुजारियों की नियुक्ति के लिए राज्‍यभर में परीक्षा कराने पर विचार कर रही है। पुजारियों की सैलरी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

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