Published On: Mon, Apr 16th, 2018

न्यायापालिका से मतभेद खत्म करने की सरकार कर रही है कोशिश

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार और न्यायापालिका के बीच बढ़ते मतभेद के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए कानून मंत्री रविशंकर सिंह और देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा इस माह के अंत में मुलाकात करेंगे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कानून मंत्रालय के न्यायापालिका से जुड़े विभाग ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के लिए लंबित मुद्दों पर एक नोट तैयार किया है। इन मुद्दों को प्रस्तावित बैठक में उठाया जाएगा। हालांकि प्रस्तावित बैठक की तारीख अभी तक पता नहीं चल सकी है।

कानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कानून मंत्री और सीजेआई विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए जल्द बैठक कर सकते हैं। लेकिन इसे ज्यादा उछाला नहीं जाना चाहिए। अगर बैठक होती है, तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। जस्टिस केएम जोसेफ और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मलहोत्रा पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ में शामिल करने के मुद्दे पर सरकार और न्यायापालिका के बीच चर्चा होनी है। हालांकि कर्नाटक के एक जिला जज को हाईकोर्ट में प्रोन्नति देने की सिफारिश पर विवाद है क्योंकि उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप है। इन मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होनी है।

इस बैठक में मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर को भी अंतिम रूप दिए जाने में देरी पर बातचीत होगी। इसके तहत हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रोन्नति और तबादला निर्धारित होता है। यह बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर और कुरियन जोसेफ ने भी कार्यपालिका के खिलाफ यह कह कर मोर्चा खोला हुआ है कि कार्यपालिका आजकल न्यायापालिका की सिफारिशों को काटने का काम कर रही है। इन दोनों जजों ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखे पत्रों में इस मुद्दे को उठाया है।

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