Published On: Fri, Apr 20th, 2018

राजनीतिक लड़ाई जनता के बीच करनी चाहिए, कोर्ट में नहींः कानून मंत्री रविशंकर

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नई दिल्ली। न्यायाधीश लोया केस में एसआईटी की जांच की मांग पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी की ओर से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाता सम्‍मेलन किया। उन्होंने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि मेरे ख्याल में कांग्रेस पार्टी के लोग फॉरेंसिक एक्सपर्ट नहीं हैं। इस पूरे मामले में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने अपना फैसला दिया है। इसलिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। कानून मंत्री ने कहा कि कुछ लोग फैसले को तभी मानते हैं जब वह उनके मन के लायक हो।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘जज लोया शादी में गये थे, हार्टअटैक हुआ। वो बच नहीं पाए। कोर्ट ने पैरा 27 में कहा है कि सभी पक्षों को पूरा मौका दिया गया। उन्‍होंने कहा, ‘ जज लोया की 1 दिसंबर 2014 को मौत हुई। तीन साल तक कोई चर्चा नहीं हुई। 2017 में कारवां में एक लेख आया। उसके बाद खुराफात शरू हुई। रविशंकर ने कहा कि हमलोगों ने खामोशी बरती क्योंकि मामला कोर्ट में था, लेकिन राहुल गाँधी ने बहुत कुछ कहा।

कानून मंत्री ने आगे कहा, ‘कोर्ट ने चार मेंबर ज्यूडिशियल रिपोर्ट को जांचा। लोया ने सीने मे दर्द की शिकायत की थी। इनका स्टेटमनेंट चीफ जस्टिस की सलाह पर रिकॉर्ड हुआ। बहस में चारों जजों पर टिप्पणी की गई। ज्यूडिशियल अफसर को बदनाम करने की कोशिश की गई। ये केस जनहित का नहीं, कांग्रेस के हित का था, अमित शाह के खिलाफ। उनके नाम पर कलंक आए इसलिए केस फ़ाइल किया गया। हम खामोश थे क्योंकि कोर्ट की कार्रवाई चल रही थी। ये राजनीति से प्रेरित केस था जनहित का नहीं।

उन्‍होंने राहुल गांधी से सवाल पूछते हुए कहा, ‘आप पार्टी के प्रेसिडेंट हैं। आज कोर्ट के फैसले पर आपका क्या कहना है। क्‍या आप जनता के बार-बार हराने के बाद कोर्ट के गलियारे से अपनी राजनीति बढ़ाएंगे? जनता के बीच लड़ाई जनता के बीच ही लड़ें। कोर्ट में गलत आरोप ना लगाएं। क्या आपको माफ़ी नहीं मांगना चाहिए।’

रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस अगर कोर्ट के फैसले को नहीं मानती है तो मैं क्या कह सकता हूँ। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम फैसला होता है। अगर राहुल गांधी और उनकी पार्टी के लोग इसे नहीं मानते हैं तो राहुल गांधी इस पर भी जवाब दें।’ जजों की नियुक्ति के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र है।

बता दें कि सीबीआई जज बीएच लोया की मौत के मामले में स्वतंत्र जांच की जाए या नहीं, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की जांच वाली मांग की याचिका को ठुकरा दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका में कोई दम नहीं है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के बयान पर हम संदेह नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई मैदान में की जानी चाहिए, कोर्ट में नहीं। कोर्ट ने माना है कि जज लोया की मौत प्राकृतिक है। कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

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