Published On: Sun, Apr 22nd, 2018

दुनिया पर मेहरबान हुए उत्तर कोरिया के छोटे उस्ताद, परमाणु परीक्षण बंद कर विकास और शांति की ओर बढ़ने की कही बात

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नई दिल्‍ली। कोरियाई प्रायद्वीप के बीच होने वाली बैठक से पहले उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन ने बड़ी और अहम घोषणा की है। उन्‍होंने कहा है कि अब वह परमाणु परीक्षण नहीं करेंगे। उन्‍होंने कहा है कि अब इस तरह के परीक्षणों की जरूरत नहीं है क्‍योंकि पूर्व में किए गए मिसाइल परीक्षण अपने मुकाम को पाने में पूरी तरह से सफल हुए हैं। उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक देश के उत्तर में स्थित न्‍यूक्लियर साइट ने अपना मिशन पूरा कर लिया है। किम की तरफ से यह घोषणा दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे से होने वाली बैठक से छह दिन पहले की गई है।

किम ने 27 अप्रैल को होने वाली इस अहम बैठक का सीधा प्रसारण करने की भी योजना बनाई है। अब दुनिया इस खास मौके पर अपने टीवी पर देख सकेगी। इसको लेकर 18 अप्रैल को दोनों देशों के बीच समझौता भी हुआ है। माना जा रहा है कि इस तरह से किम अपनी छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच 27 अप्रैल को पुनमुनजोम में होनी है। इससे पहले दोनों राष्‍ट्राध्‍यक्षों के बीच टेलीफोन हॉटलाइन स्थापित की जा चुकी है। इस बैठक पर सभी देशों की निगाहें लगी हुई हैं।

ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि मई में किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप की बैठक होनी है और मून के साथ होने वाली बैठक इसके लिए रोड़मैप तैयार करने में मददगार साबित होगी। इससे पहले हुई किम की घोषणा से सकारात्‍मक माहौल तैयार होने में जरूर मदद मिलेगी। उत्तर कोरिया की तरफ से हुई इस महत्‍वपूर्ण घोषणा के पीछे चीन को भी एक वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले माह ही किम जोंग उन ने बीजिंग की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मून और ट्रंप के साथ होने वाली वार्ता को लेकर भी विचार विमर्श हुआ था। माना जा रहा है कि किम की सोच में यह बदलाव चीन के राष्‍ट्रपति चिनफिंग के कहने पर ही आया है।

किम द्वारा की गई इस घोषणा की जानकारी योनहॉप न्‍यूज एजेंसी ने भी दी है। इसके मुताबिक उत्तर 21 अप्रैल से परमाणु मिसाइलों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण को रोक देगा। इस खबर के आने के बाद अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस पहल का स्‍वागत किया है। उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा है यह उत्तर कोरिया और पूरी दुनिया के लिए एक बहुत अच्छी ख़बर है। उन्‍होंने इस घोषणा को बड़ी सफलता करार दिया है। इसके साथ ही ट्रंप ने कहा है कि हम आगामी मुलाकात को लेकर आशावान हैं। आपको यहां पर बता दें कि दो दिन पहले ही उन्‍होंने कहा था कि यदि किम से उनकी बातचीत सही रास्‍ते पर जाती हुई नहीं दिखाई दी तो वह वार्ता बीच में ही छोड़ देंगे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाने के कारण उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखे हैं।

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने पिछले वर्ष सितंबर में छठा परमाणु परीक्षण किया था। यह परीक्षण उत्तरी हामग्‍योंग प्रांत में स्थित पुंगी-री-न्‍यूक्लियर साइट पर अंडरग्राउंड किया गया था। इसकी वजह से वहां और आसपास के इलाकों में 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप को रिकॉर्ड किया गया था। उत्तर कोरिया के इतिहस का यह सबसे बड़ा परीक्षण था।

उत्तर कोरिया की तरफ से की गई इस ताजा घोषणा पर सभी देशों ने खुशी जाहिर की है। हालांकि जापान ने इस घोषणा को अपर्याप्त और असंतोषजनक बताया है। जापान की तरफ से कहा गया है कि ये देखना जरूरी होगा कि उत्तर कोरिया अपनी न्‍यूक्लियर साइट को कहे मुताबिक बंद या खत्‍म कर रहा है या नहीं। जापान ने यह भी कहा है कि उत्तर कोरिया द्वारा की गई घोषणा का ये मतलब नहीं है कि उनकी मिसाइलें जापान तक नहीं आ सकती हैं। वहीं चीन ने किम की इस घोषणा को सकारात्‍मक कदम बताते हुए उनकी तारीफ की है। चीन की तरफ से कहा गया है यह फैसला अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की सोच के मुताबिक लिया गया है। इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापना की तरफ आगे बढ़ा जा सकेगा। चीन ने यह भी कहा है कि आखिरकार सभी पार्टियां एक समान सोच रही हैं और फैसला ले रही हैं, पूरे क्षेत्र के विकास के लिए काफी अच्‍छा है। इसके अलावा चीन ने एक बार इस बात को कहा है कि चीन इस मुद्दे पर अंत तक एक सकारात्‍मक पहल करता रहेगा और अहम भूमिका निभाता रहेगा।

चीन ने किम की घोषणा के बाद ये भी कहा है कि अब पूरी दुनिया को उत्तर कोरिया के प्रति नजरिया बदल लेना चाहिए। चीन ने यह भी कहा है कि दुनिया को उत्तर कोरिया की परेशानी समझनी चाहिए। वह अमेरिका और उसके समर्थकों के दबाव में दबा हुआ है। ताजा घोषणा के बाद अब पश्चिमी देशों को उत्तर कोरिया पर हमले करना बंद कर देना चाहिए। उत्तर कोरिया की इस घोषणा से यह बात जाहिर हो चुकी है कि वह विकास और शांति चाहता है। चीन की सरकारी मीडिया की तरफ से कहा गया है कि उत्तर कोरिया चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और रूस का पड़ोसी देश है। भूगौलिक स्थिति के लिहाज से भी वह काफी अहम हो जाता है। इसके अलावा यदि वह चाहेगा तो एशियन इंडस्‍ट्रियल चेन से भी जुड़ सकेगा। चीन ने उत्तर कोरिया को कहा है कि वह चाहे तो दक्षिण कोरिया और चीन के साथ मिलकर स्‍पेशल इकनॉमिक जोन बना सकता है, जहां से उसको विकास की उड़ान भरने में आसानी होगी।

किम की इस घोषणा के बाद सीआईए के विशेषज्ञ सू मी टैरी का कहना है कि आगामी वार्ता में किम सीधे मुद्दों पर बात करेंगे और जो प्रतिबंध उनके ऊपर लगाए गए हैं उनको खत्‍म करवाना उनका पहला मकसद होगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में उत्तर कोरिया ने अपना आखिरी टेस्‍ट किया था। इसके तहत उसने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था जिसको सफल बताया गया था। उस वक्‍त दावा किया गया था कि यह मिसाइल अमेरिका तक मार करने में सक्षम है। हालांकि इस परीक्षण की सभी देशों ने कड़ी निंदा की थी और कहा था कि यह को‍रियाई प्रायद्वीप में तनाव को बढ़ाएगा। गौरतलब है कि डोनाल्‍ड ट्रंप और किम की वार्ता का रोड़मैप तैयार करने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी के डायरेक्‍टर माइक पोंपियो 31 मार्च को उत्तर कोरिया गए थे।

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