Published On: Sun, Apr 22nd, 2018

देशभर में बढ़ रहे बलात्कार से घबरा कर मोदी सरकार ने आननफानन में किया पॉक्सो एक्ट में संशोधन, बलात्कारियों को हो सकती है फाँसी

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नई दिल्ली। हाल में देश के चार राज्यों में लगातार बलात्कार के घटनाओं से घबराए केंद्र सरकार ने आननफानन में निर्णय लेते हुए कहा है कि फिलहाल वह नाबालिग बच्चों से बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा देने के लिए अध्यादेश लाएगी। बता दें कि सरकार ने इस अध्यादेश को लाने के फैसले पर मुहर लगाई है और आगे वह इसके जरिए कानून बनाएगी। जिसमें 12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप करने वाले दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जाएगी। केंद्र सरकार इसके लिए ‘द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट’ (पॉक्सो एक्ट) में संशोधन करेगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लंदन से ही दिल्ली में शनिवार को तुरंत इमरेंजसी मीटिंग करने का निर्देश दिया था। उनकी देश वापसी शनिवार सुबह हुई। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग के लिए 3 ऑर्डिनेंस तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय के पास जमा करने को कहा था। पहला ऑर्डिनेंस रेप कानून को सख्त करने से जुड़ा था, दूसरा भगोड़े कर्जदारों पर नकेल कसने वाला और तीसरा एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव को लेकर। शनिवार को लगभग 3 घंटे चली मैराथन मीटिंग के बाद 2 ऑर्डिनेंस को मंजूरी दे दी गई और एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव से जुड़े ऑर्डिनेंस पर फिलहाल रुकने का फैसला लिया गया।

इसके पीछे तर्क था कि फिलहाल एससी-एसटी ऐक्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गई है तो सरकार पहले कोर्ट की राय का इंतजार करेगी। ताजा विवाद भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही शुरू हुआ था, जब मौजूदा ऐक्ट में बदलाव करने का फैसला देते हुए इसमें तुरंत जेल भेजने के प्रावधान को बदल दिया गया था। इसके बाद पूरे देश में दलित आंदोलन हुआ और विवाद बढ़ता देख सरकार इस फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट गई। कभी-कभार ही ऐसा होता है कि सरकार एक दिन में 2 ऑर्डिनेंस जारी करे।

कर्नाटक में चुनाव को लेकर मध्यम वर्गीय के आंदोलन से डर गई थी मोदी सरकार

पिछले कुछ दिनों से 2 मुद्दों पर मोदी सरकार न सिर्फ विपक्ष के हमले का शिकार हो रही थी, बल्कि मिडल क्लास की नाराजगी का भी सामना कर रही थी। विजय माल्या के बाद जिस तरह नीरव मोदी भी देश छोड़कर भागा, यह करप्शन के खिलाफ मोदी सरकार की लड़ाई के दावे पर गहरा सवाल बन कर सामने आया। धारणा के स्तर पर इस मुद्दे पर सरकार के लिए बचाव करना कठिन हो रहा था। उसी तरह कठुआ और उन्नाव रेप के बाद भी मिडल क्लास में काफी आक्रोश देखने को मिला। मासूम बच्चियों से रेप की घटनाओं के खिलाफ पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हए। इस मुद्दे पर समाज के हर तबके का आक्रोश सामने आया। यह ऐसा तबका था, जो न सिर्फ वर्ष 2014 में मोदी सरकार की बड़ी जीत का बड़ा कारक था, बल्कि 4 वर्षों तक सरकार के साथ पूरी तरह हर मुद्दे पर खड़ा था। ऐसे में दोनों मुद्दों पर विपक्ष के हमले के बीच मिडल क्लास के गुस्से ने सरकार को डैमेज कंट्रोल मोड में डाल दिया। 27 अप्रैल के बाद पीएम मोदी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में लगातार प्रचार करने जाएंगे। वहां कांग्रेस इन दोनों मुद्दे के बहाने मोदी सरकार पर हमलावर है। अब पीएम मोदी इन 2 ऑर्डिनेंस के जारी होने के बाद पलटवार कर सकते हैं।

सूत्रों की माने तो सरकार इसी के साथ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का बंदोबस्त भी करेगी। फॉरेंसिक जांच की मदद से सबूत जुटाए जाएंगे। यह अध्यादेश जिस दिन आएगा, उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। अध्यादेश से पहले के केसों पर यह लागू नहीं होगा। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार नाबालिगों के रेप-गैंगरेप के मामले को लेकर जो कानून आगे लाएगी, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ, गुजरात के सूरत और मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई घटनाओं पर लागू नहीं हो सकेगा।

पॉक्सो एक्ट में फिलहाल रेप-गैंगरेप सरीखे जघन्य अपराधों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है। न्यूनतम सजा के रूप में फिलहाल दोषियों को सात साल की जेल की सजा सुनाई जाती है। दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद कानून में कुछ संशोधन किए गए थे।

ऐसा होगा नया पॉस्को कानूनः
  • महिला से बलात्‍कार करने पर दोषी को सात से दस साल तक की कठोर कारावास की सजा जिसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है।
  • अगर पीड़िता की उम्र 16 साल से कम है तो दोषी को 10 से 20 साल तक की सजा जो उम्रकैद तक बढ़ाई जा सकती है। उम्रकैद की सजा का मतलब जब तक वह शख्‍स जीवित रहेगा तब तक जेल में ही रहेगा।
  • अगर 16 साल से कम उम्र की लड़की के साथ गैंग रेप के आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
  • 12 साल से कम उम्र की बच्‍ची के साथ रेप होने पर 20 साल से उम्रकैद तक की सजा और फांसी की सजा भी हो सकती है।
  • 12 साल से कम उम्र की बच्‍ची का रेप होता है तो दोषी को उम्रकैद से लेकर फांसी की सजा हो सकता है और ऐसे मामलों की जांच जल्‍द की जाएगी और ट्रायल भी तेजी से पूरा किया जाएगा।
  • सभी बलात्‍कार के मामलों की जांच दो महीने में पूरी हो जानी चाहिए।
  • छह महीने में याचिका का निपटारा होना चाहिए।
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