Published On: Wed, Apr 25th, 2018

बलात्कार के दोषी आसाराम को हुई उम्रकैद की सज़ा! जानिए चायवाला से बापू बनने की पूरी कहानी

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नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए गए आसाराम को उम्रकैद की और अन्य दो दोषियों को 20-20 साल कैद की सजा सुनाई गई है। जोधपुर कोर्ट में आज इस मामले में आसाराम समेत 3 लोगों को दोषी करार दिया गया और दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। जस्टिस मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर जेल में अपना यह फैसला सुनाया। बहस के दौरान वकीलों ने आसाराम की अधिक उम्र का हवाला देते हुए उनके लिए कम सजा की मांग की थी। इस मामले में अंतिम सुनवाई एससी/एसटी की विशेष अदालत में सात अप्रैल को पूरी हुई थी और अदालत ने फैसले को सुरक्षित रखते हुए 25 अप्रैल को सुनाने की बात कही थी।

जोधपुर की कोर्ट ने सुरक्षा कारणों से सेंट्रल जेल परिसर में ही फैसला सुनाने का निर्णय किया था। कोर्ट ने आसाराम के अलावा सह आरोपी शरतचंद्र और शिल्पी को भी दोषी करार दिया है। वहीं शिवा और प्रकाश को बरी किया गया है। फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। फैसला आने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम को दोषी ठहराया गया है, हमें न्याय मिला है। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस लड़ाई में हमारा समर्थन किया। अब मुझे आशा है कि उसे सख्त सजा मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि जिन गवाहों की हत्या या अपहरण किया गया था, उन्हे भी न्याय मिला।

अदालत का फैसला आने के बाद आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने कहा हम कानून के जानकारों से चर्चा करेंगे और फिर भविष्य की कार्रवाई का फैसला करेंगे। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। वहीं, आसाराम व उसके पुत्र नारायण साईं के खिलाफ चल रहे केसों में अहम गवाह पानीपत के गांव सनौली निवासी महेंद्र चावला ने अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है। आसाराम को दोषी ठहराए जाने से पहले उन्होंने कहा कि मैं न्यायपालिका पर भरोसा करता हूं और मुझे विश्वास है कि आसाराम को दोषी ठहराया जाएगा। मैं न्यायपालिका से अनुरोध करता हूं कि ऐसे दुष्कर्मियों को फांसी दी जानी चाहिए। हालांकि मेरे पास सुरक्षा है लेकिन मैं अतिरिक्त सुरक्षा के लिए केंद्र से अनुरोध करता हूं। अन्य गवाहों की तरह मेरा जीवन लगातार खतरे में है।

हालांकि फैसला आने से पहले देशभर में आसाराम के लिए अनुयायी पूजा पाठ में जुटे रहे। आसाराम के विभिन्न आश्रमों में अनुयायी इकठ्ठा होकर उसकी रिहाई के लिए पूजा कर रहे थे, लेकिन उनकी यह पूजा पाठ भी आसाराम के काम नहीं आयी। बता दें कि आसाराम पर पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। उनके खिलाफ पीड़िता ने दिल्ली जाकर 20 अगस्त, 2013 को कमला नगर पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। वहां से केस जोधपुर रेफर किया गया था। जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त, 2013 को इंदौर से आसाराम को गिरफ्तार किया था। तब से वह जोधपुर जेल में बंद हैं।

पीड़िता ने जब आसाराम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे तब वह छिंदवाड़ा आश्रम के कन्या छात्रावास में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। जानकारी के अनुसार पीड़िता के पिता के पास 7 अगस्त,2013 को छिंदवाड़ा आश्रम से फोन आया कि उनकी बेटी बीमार है। इस पर पीड़िता के पिता वहां पहुंचे तो उन्हे बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है, जिसे सिर्फ आसाराम ही ठीक कर सकते हैं। पीड़िता के माता-पिता अपनी बेटी के साथ 14 अगस्त को आसाराम से मिलने जोधपुर आश्रम में पहुंचे। इसके अगले दिन 15 अगस्त को आसाराम ने 16 साल की पीड़िता को अपनी कुटिया में बुला लिया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।

पीड़िता ने इस मामले की जानकारी अपने माता-पिता को दी तो उन्होंने 20 अगस्त,2013 को दिल्ली कमलानगर पुलिस थाने में रात 2 बजे एफआरआर दर्ज कराई थी। मामला जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया। जोधपुर पुलिस ने जांच के बाद आसाराम को 30 अगस्त की आधी रात इंदौर स्थित आश्रम से गिरफ्तार किया था। उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर में पीड़िता के घर पर पांच पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक के.बी. सिंह ने बताया कि पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही है।

सज़ा सुनते ही रो पड़े बापू, उम्र के आधार पर सज़ा कम करने की लगाई गुहार

आसाराम को रियायत देने से इनकार करते हुए जज मधुसूदन शर्मा ने कहा कि उनका अपराध घिनौना है और उन्हें मौत तक जेल में रहना होगा। सूत्रों के मुताबिक फैसला सुनते ही आसाराम फूट-फूटकर रोने लगा और अपनी पगड़ी उतार दी। वह करीब 10 मिनट तक कुर्सी पर बैठा रहें। अदालत ने पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट समेत 14 धाराओं में आसाराम को दोषी करार दिया है। आसाराम के वकीलों ने सजा कम करवाने के लिए तमाम दलीलें दीं, लेकिन वह भी काम न आईं। एससी-एसटी कोर्ट के विशेष जज मधुसूदन शर्मा की अदालत में आसाराम के वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किल को कम से कम सजा दी जानी चाहिए, क्योंकि उनकी उम्र अधिक है।

2013 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आसाराम की आयु फिलहाल 78 वर्ष के करीब है। अपराध के दौरान उनकी आयु 74 वर्ष थी। ऐसे में उनके वकीलों का कहना था कि आसाराम की आयु काफी अधिक है और इसके मद्देनजर उन्हें 10 वर्ष से कम की सजा दी जानी चाहिए। हालांकि पीड़िता के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आसाराम को कड़ी से कड़ी सजा जाए।

लंच के बाद दोबारा शुरू हुई अदालत की कार्यवाही में विशेष जज मधुसूदन शर्मा ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद आसाराम का आजीवन कैद की सजा सुनाई। बता दें कि छात्रावास की वार्डन शिल्पी इलाज के लिए छात्रा को प्रेरित कर आसाराम के पास भेजती थी। वहीं आसाराम के गुरुकुल के संचालक शरतचंद्र पर आरोप है कि उसने छात्रा की बीमारी का इलाज नहीं कराया। उसने छात्रा के परिजनों को भ्रमित किया कि छात्रा का इलाज सिर्फ आसाराम ही कर सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि कभी लाखों भक्‍तों के बीच आलीशान जिंदगी जीने वाला आसाराम नाबालिग बच्‍ची के साथ रेप के मामले में बुधवार को जोधपुर की एक अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद सिर पकड़कर जोर-जोर से रोने लगा। उसकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। उसे कुछ समय के लिए छोड़ दिया गया ताकि वह सामान्‍य हो सके। थोड़ी देर बाद पुलिसकर्मी उसे जेल लेकर गए। वहीं कोर्ट परिसर में उपस्थित लोगों के बीच बात चल रही थी कि जिनको खुद अपने भविष्या का पता नही वो लोगो के भगवान बने बैठे थे। लेकिन भगवान तो ऊपर वाला ही है उसकी लाठी जब पड़ती है तो आवाज भी नहीं होती।

वहीं, टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनवाई शुरू होने पर आसाराम सामान्‍य दिख रहा था। सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब आसाराम हंस पड़ा। हालांकि जल्‍द ही उसकी यह हंसी काफूर हो गई। जोधपुर कोर्ट में जैसे ही जज ने अपना फैसला सुनाना शुरू किया, आसाराम के चेहरे की रंगत उड़ने लगी। शायद आसाराम ने यह सपने भी नहीं सोचा होगा कि उसे अब जिंदगीभर जेल में रहना पड़ेगा। उसकी हालत देखकर वहां मौजूद पुलिस और जेल अधिकारियों ने आसाराम को कुछ देर के लिए छोड़ दिया ताकि वह सामान्‍य हो सके। बाद में उसे जेल परिसर में ले जाया गया। उसे किस बैरक में रखा जाए, जल्‍द ही इसके बारे में जेल अधिकारी फैसला करेंगे।

इससे पहले मंगलवार को जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम बेहद शांत नजर आ रहे थे। जिलाधिकारी ने जब आसाराम से पूछा कि उनका फैसले के बारे में क्‍या अनुमान है तो स्‍वयंभू बाबा ने कहा था, ‘होई हैं वही जो राम रचि राखा।’ अर्थात जैसा भगवान राम फैसला करेंगे, वैसा होगा। यही नहीं बुधवार को फैसले के दिन आसाराम सुबह जल्‍दी उठ गया था।

11 दिनों में आसाराम को पकड़ने वाले आईपीएस अधिकारी को मिले धमकी भरे 1,600 खत

रेप के मामले में आसाराम को दोषी ठहराना इतना आसान भी नहीं था। इसकी एक अहम कड़ी हैं आईपीएस अधिकारी अजय पाल लांबा। आज के दिन यह जानना काफी दिलचस्प है कि आखिर पुलिस के शिकंजे में आसाराम कैसे आए और उसमें लांबा की क्या भूमिका थी। आईपीएस अधिकारी अजय पाल लांबा उस दिन अपने दफ्तर में थे जब दिल्ली की एक टीम एक नाबालिग बच्ची और अपने पिता के साथ उनसे मिलने 21 अगस्त 2013 को पहुंची। लांबा उस वक्त जोधपुर वेस्ट के डेप्युटी कमिश्नर थे। बच्ची ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

फिलहाल ऐंटी करप्शन ब्यूरो में तैनात लांबा याद करते हैं कि कैसे पहली बार में उन्हें नाबालिग की बात पर विश्वास ही नहीं हुआ था। उन्हें लगा कि शायद आसाराम की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। बाद में उन्हें उस लड़की और उसके परिवार की बात पर विश्वास हुआ। लांबा बताते हैं कि ‘मुझे गलत साबित करते हुए लड़की ने जोधपुर से लगभग 38 किलोमीटर दूर आसाराम के मणई गांव स्थित आश्रम का एकदम सटीक नक्शा बताया, जहां उसका शोषण किया गया था।’ तब उन्हें लगा कि कोई व्यक्ति मौका-ए-वारदात का नक्शा बिना वहां जाए कैसे बता सकता है। वहां से उन्होंने जांच शुरू की।

बाद में उन्हें पता चला कि मेरठ के एक परिवार ने भी स्थानीय पुलिस से आसाराम के खिलाफ ऐसी ही शिकायत की थी। जब वह उस परिवार से मिलने गए तब परिवार ने शिकायत करने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस का शक और गहरा हो गया। बता दें कि पुलिस को बड़ी सफलता 31 अगस्त को लगी। लांबा बताते हैं, ‘हमें आसाराम का कुछ पता नहीं था। फिर भी पांच पुलिस अफसरों और 6 कमांडो की एक टीम को इंदौर स्थित आश्रम भेजा गया। तभी जोधपुर में हमने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसमें हमने कहा कि आसाराम हमारे रडार पर है। इस पर बौखलाकर कर आसाराम भोपाल एयरपोर्ट पर पहुंचे। हमने यह बात मीडियाकर्मियों को बता दी जो उनका पीछा करने लगे। आसाराम अपने इंदौर स्थित आश्रम में पहुंच गए लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि हमारी टीम भी शहर में है।’

उसके बाद आसाराम और उनके अनुयायियों ने पुलिसवालों को लालच देने की कोशिश की। लांबा बताते हैं कि उन्हें बड़ी रकम की पेशकश से लेकर जान की धमकी दी गई। वह कहते हैं कि इस सबके बीच लोगों के विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। लांबा बताते हैं कि उन्हें कम से कम 1,600 ऐसे खत मिले जिनमें लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।

पीड़िता ने बताया जोधपुर फार्महाउस की काली कहानी

जोधपुर के फार्महाउस से शुरू हुआ था सिलसिला और यहीं के सेंट्रल जेल में आसाराम का चैप्‍टर हुआ क्‍लोज। पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2013 के अगस्‍त माह में जोधपुर के एक फार्म हाउस में आसाराम ने इलाज के बहाने उसका यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता ने दिल्ली के कमलानगर थाने में 19 अगस्त 2013 को आसाराम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और 31 अगस्‍त 2013 को मध्‍यप्रदेश के इंदौर से आसाराम को गिरफ्तार किया गया। बता दें कि आसाराम पर जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज हुई थी और बाद में इसे जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया। आसाराम के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 376, 354-ए, 506, 509/34, जेजे एक्ट 23 व 26 और पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज हुआ था। जोधपुर सेशन कोर्ट में आसाराम के खिलाफ केस चला कोर्ट ने आरोप तय किए।

आरोप पत्र में 58 गवाह पेश किए गए, अभियोजन पक्ष की तरफ से 44 गवाहों ने गवाही दी। 11 अप्रैल 2014 से 21 अप्रैल 2014 के दौरान पीड़िता के 12 पेज के बयान दर्ज किये गए। 4 अक्टूबर 2016 को आसाराम के मुल्जिम बयान दर्ज किए गए। 22 नवंबर 2016 से 11 अक्टूबर 2017 तक बचाव पक्ष ने 31 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके साथ ही 225 दस्तावेज जारी किए। जोधपुर एससी-एसटी कोर्ट में 7 अप्रैल को बहस पूरी हो गई और कोर्ट ने फैसला सुनाने की तारीख 25 अप्रैल तय की।

उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी पीड़िता ने हिम्‍मत दिखाई और आईपीसी की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस की चार्जशीट में पीड़िता का बयान- आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली लड़की की तबीयत खराब होती है। जिसे बाबा की अनुयायी लड़की पर प्रेत का साया बताती है और आसाराम बापू के पास समाधान के लिए जाने की सलाह देती है। 14 अगस्त 2013 को पीड़ित लड़की को आश्रम में आसाराम के पास ले जाया जाता है।

आसाराम और पीड़िता की वार्ता

आसाराम- हम तुम्हारा भूत उतार देंगे। तुम कौन सी क्लास में पढ़ रही हो?
पीड़िता- बापू, मैं सीए करना चाहती हूं।
आसाराम- सीए करके क्या करोगी तुम। बड़े से बड़े अधिकारी मेरे पैरों में पड़े रहते हैं। तुम तो बीएड करके शिक्षिका बनो। तुम्हें अपने गुरुकुल में शिक्षिका लगा दूंगा। इसके बाद में प्रिंसिपल भी बना दूंगा। अभी तुम पर भूत का साया है। तुम रात को वापस आओ। तुम्हारा भूत उतारूंगा।
पीड़ित लड़की- ठीक है बापू!

इसके बाद पीड़िता वहां से चली गई। 15 और 16 अगस्त 2013 की रात उसे कुटिया के अंदर बुलाया जाता है। कुटिया में रसोइया एक गिलास दूध लेकर आया। इसके बाद आसाराम ने लड़की के साथ वो किया, जो एक संत बिल्कुल नहीं कर सकता है। आरोप है कि लड़की का यौन उत्पीड़न करने के बाद आसाराम ने उसको धमकी भी दी थी।

इसतरह रहा थाउमल हरपलानी से आसाराम बापू का सफर

जिस आसाराम का जिक्र पिछले पांच वर्षों में बार-बार होता रहा है वह आखिर कहां से आया? कौन है ये आसाराम? और क्‍या है इसका असली नाम? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो दुनियाभर के लोगों की जहन में भी कई बार उठे होंगे, लेकिन आपको इनका जवाब नहीं मिला होगा। आज हम आपको इन सवालों का जवाब देंगे। स्‍वयंभू घोषित आध्‍यात्मिक गुरु आसाराम का असली नाम असुमल थाउमल हरपलानी है। वह मूल रूप से पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत से ताल्‍लुक रखता है। जिस वक्‍त देश का बंटवारा हुआ और पाकिस्‍तान एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र के तौर पर सामने आया उस वक्‍त उसका परिवार वहां से भारत में गुजरात आ गया था। यहां पर उसके परिवार ने अहमदाबाद को अपना नया घर बनाया। कहा तो ये भी जाता है कि आसाराम के पिता लकड़ी और कोयले के कारोबारी थे।

आसाराम ने अपनी बायोग्राफी में तीसरी क्‍लास तक पढ़ाई करने की बात कही है। आधयात्मिक गुरू बनने से पहले उसने जीवनयापन के लिए कभी तांगा चलाया तो कभी चाय बेची। 15 वर्ष की आयु में उसने अपना घर छोड़ दिया और गुजरात के भरुच स्थित एक आश्रम में आ गया। यहां से ही उसका दूसरा जीवन शुरू हुआ। यहां पर उसने आध्यात्मिक गुरु लीलाशाह नाम से दीक्षा ली। कहा जाता है कि इससे पहले उसने साधना भी की। दीक्षा के बाद लीलाशाह ने ही उसका नाम आसाराम बापू रखा था।

1973 में आसाराम ने अहमदाबाद के मोटेरा गांव में अपना पहला आश्रम खोला और ट्रस्‍ट की स्‍थापना की। धीरे-धीरे आसाराम का प्रभाव और दायरा बढ़ता चला गया और उसका साम्राज्‍य भी कई दूसरे राज्‍यों में फैल गया। 1973 से 2001 तक उसने कई गुरुकुल, महिला केंद्र बनाए। एक समय था जब आसाराम की तूती राजनीतिक पार्टियों में भी खूब बजती थी। इतना ही नहीं उसके दर पर राजनीतिक लोगों का आना जाना भी लगा रहता था। 1997 से 2008 के बीच उस पर दुष्‍कर्म समेत जमीन हड़पने और हत्या जैसे कई आरोप भी लगे। इसके अलावा 2008 में आसाराम के स्कूल में हुई एक बच्‍चे की मौत पर काफी बवाल भी मचा था। उस वक्‍त भी आसाराम पर कई तरह के आरोप लगे थे।

4 करोड़ भक्‍त और 10 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक हैं आसाराम

विवादित बाबा आसाराम के पास न भक्‍तों की कमी है और न ही पैसे की। आसाराम ट्रस्‍ट से जुड़े लोगों का दावा है कि उसके विश्‍वभर में करीब 4 करोड़ भक्‍त हैं और गुजरात पुलिस की मानें तो स्‍वयंभू बाबा के पास 10 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की संपत्ति है। वर्ष 2014 में गुजरात पुलिस ने खुलासा किया था कि रेप मामले में जेल में बंद आसाराम के पास दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। पुलिस ने बताया कि अकूत संपत्ति के मालिक आसाराम की देशभर में जमीनें हैं, जिसकी कीमत अभी आंकी नहीं गई है। यह आंकड़ा वर्ष 2014 का है और वर्ष 2018 में आसाराम की संपत्ति की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

सूरत पुलिस के मुताबिक आसाराम के आश्रमों पर छापे के दौरान मिले दस्तावेजों की जांच में साबित हुआ कि उनके आश्रमों के पास बैंक खातों और अन्य इन्वेस्टमेंट के रूप में 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक की दौलत है। उसने बताया कि 10,000 करोड़ रुपये में जमीन की कीमत शामिल नहीं हैं। गुजरात में आसाराम की 10 जिलों में 45 स्थानों पर जमीन है। इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों में 33 जगहों पर आसाराम की जमीनें हैं। इसके अलावा सूरत के इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं के पास 2500 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति का पता लगाया है जिसका ब्‍यौरा ही कहीं दर्ज नहीं था। उन्‍हें यह जानकारी आसाराम के अहमदाबाद स्थित आश्रम से मिले 42 बैग में भरे दस्‍तावेजों से मिली थी।

इस खुलासे के बाद डिपार्टमेंट ने आसाराम और उनके बेटे पर 750 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके अलावा आसाराम के कई आयुर्वेदिक प्रॉडक्‍ट बाजार में बेचे जाते थे। आसाराम के दिल्‍ली स्थित आश्रम में काम करने वाले अन्‍नू ने दावा किया कि बाबा जी के 4 से 5 करोड़ भक्‍त हैं जो पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। आसाराम के रुतबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक समय में एयरपोर्ट पर उनकी जांच नहीं होती थी। वे सीधे अपने प्‍लेन तक पहुंच जाते थे। गौरतलब है कि 17 अप्रैल 1941 को आसाराम का जन्‍म पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत में हुआ था। आसाराम अपने शादी से 8 दिन पहले वह 15 साल की उम्र में घर छोड़कर एक आश्रम चले गए। एक समय में उनके भक्‍तों में मध्‍य प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री और वर्तमान समय में केंद्रीय मंत्री उमा भारती और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता अशोक गहलोत भी शामिल थे।

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