बब्बर और रशीद के बाद फारूक बेच रहे हैं एक रुपये में खाना

Gudden.in Online Shopping

नई दिल्ली। मुम्बई में 12 रुपये में और दिल्ली में 5 रुपये में खाना परोसकर राज बब्बर और रशीद मसूद भारत के आम और भोले जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। ये दोनों पूरी तरह से जनता को लूटने की फिराक में हैं। इनके चक्कर में मत पड़ना। अन्यथा आपको खाने के लिए एक रुपये के बजाए 12 रुपये और 5 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। ऐसा कहना है फारूक अब्दुल्ला का, जिन्होंने इन दोनों का भेद खोला है। सच कहा जाता है मुस्लिम ईमानदार होता है और इमान का पकका होता है। इसका उदाहरण है फारूक साहब। इनका कहना है कि इस देश के लोगों में अगर इच्छा हो तो एक रुपये में ही भरपेट खाना मिल जाता है। ये हुई न सच्चे ईमान की बात! फारूक साहब ने सबको लूटने से बचा लिया?

जनता भोजनयोजना आयोग के गरीबी के आंकड़ों के बचाव में कांग्रेस के होनहार नेताओं ने बेतुके बयानों की बारिश कर ही दी थी, साथ ही अब योजना आयोग की वकालत करने के चक्कर में यूपीए सरकार के केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला का भी हैरतअंगेज बयान सामने आया है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पेट तो एक रुपये में भी भरा जा सकता है बस इच्छा होनी चाहिए। हालांकि, फारूक ने यह नहीं बताया कि एक रुपये में भरपेट खाने की इच्छा कैसे पूरी की जा सकती है। एक रुपये वाला खाना कहां मिलता है, इसका पता भी नहीं बताया।

इसके पहले कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने बुधवार को कहा था कि मुंबई में 12 रुपये में भरपेट भोजन किया जा सकता है, तो गुरुवार को कांग्रेस नेता रशीद मसूद ने दावा कर डाला था कि दिल्ली में भी 5 रुपये में भरपेट खाना मिल जाता है। मसूद ने कहा था कि मुंबई का तो मुझे पता नहीं, लेकिन दिल्ली में जामा मस्जिद के पास 5 रुपये में पेट भरकर खाना मिलता है। हालांकि, कई न्यूज चैनलों ने जब मसूद के दावे की पड़ताल की तो उन्हें मायूसी हाथ लगी। उन्हें 5 रुपये में जामा-मस्जिद इलाके में खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला।

राज बब्बर ने कहा था कि आज भी मुंबई में भरपेट भोजन 12 रुपये में करना संभव है। बीजेपी ने बब्बर के इस बयान को हास्यास्पद करार दिया था। हालांकि, बब्बर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह समझाने की कोशिश की कि कीमतों में इजाफे के बावजूद देश में गरीबी घटी है। बब्बर ने कहा कि लोगों को दिन में 2 वक्त पूरा भोजन मिलना चाहिए। वे कैसे हासिल कर सकते हैं, यह एक बहुत अच्छा सवाल है जिसे आपने पूछा है। आज भी मुंबई शहर में मैं 12 रुपये में भोजन कर सकता हूं… नहीं नहीं, वड़ा पाव नहीं… ढेर सारा चावल, दाल, सांभर और कुछ सब्जियां भी मिलती हैं। बब्बर ने इसके साथ ही कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि यह अच्छा है।

गौरतलब है कि योजना आयोग ने एक्सपर्ट कमिटी के सुझाए मापदंडों के आधार पर गरीबी का नया पैमाना तय किया है। इसके तहत अब गांवों में प्रति व्यक्ति 26 की जगह 27.2 और शहरों में 32 की जगह 33.3 रुपये से ज्यादा खर्च करनेवाले गरीब नहीं कहलाएंगे। आयोग के मुताबिक, 2009-10 में देश में गरीबों की संख्या 40.7 करोड़ थी, जो नई गरीबी रेखा के बाद 2011-12 में घट कर 26.9 करोड़ रह गई है।

Leave a comment

XHTML: You can use these html tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

नमो नरेन्द्र मोदी नक्सली नीतीश नीतीश कुमार पाकिस्तान प्रधानमंत्री बलात्कार बाबा रामदेव बिहार बीजेपी भारत भारत सरकार भारतीय सेना भाजपा मनमोहन सिंह मुलायम मुस्लिम मोदी राममंदिर राहुल गाँधी राजद राजनाथ सिंह राजग लोकसभा चुनाव वाराणसी सपा संसद सोनिया गाँधी सीबीआई जदयू जम्मू कश्मीर चुनाव चीन गुजरात आडवाणी आम आदमी पार्टी आरएसएस काँग्रेस अमित शाह अमेरिका अरविन्द केजरीवाल अखिलेश सरकार उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड
© 2014 रिपब्लिक हिन्द प्रसारण नेटवर्क। सभी अधिकार सुरक्षित।