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Posted By admin On Sunday, May 5th, 2013 With 0 Comments

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भारतीय पत्रकारिता’ और उसमें भी विशेषतः ‘हिन्दी पत्रकारिता’ को उन्नत और विकसित करने एवं उसके आदर्श स्वरूप की प्रतिष्ठा करने का प्रयास तथा राष्ट्र की सम्प्रभुता बनाए रखना ही रिपब्लिक हिन्द का मुख्य कर्तव्य है।

भारत के गौरव की वृद्धि, देशोन्नति के कार्य में सहयोग, देशवासियों में स्वाभिमान का संचार, देश के लिए हर प्रकार से स्वतंत्रता पाना तथा हर बात में स्वतंत्र होना रिपब्लिक हिन्द की मूलाधार है।

देश की राजनीतिक उन्नति हमारा लक्ष्य है।

राष्ट्र का सर्वांग राजनीति ही नहीं अपितु शिक्षा विषयक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक विषयों में भी हमारी सुनिश्चित नीति रहेगी। अभिप्राय यह कि राजनीतिक दृष्टि से देश की गणतंत्र व्यवस्था हमारा प्रधान लक्ष्य होगा। इसके साथ ही देश काल के अनुकूल उचित शिक्षा की व्यवस्था हो, इसके लिए यह पोर्टल सदा प्रयत्नशील रहेगा। व्यापार, व्यवसाय, कृषि आदि की उन्नति के द्वारा भारत फिर धन-धान्य से परिपूर्ण हो, यह भी हमारे प्रधान उद्देश्यों में रहा है। देश के प्रत्येक नर-नारी को पर्याप्त अन्न-वस्त्र मिले, यही हमारा मुख्य लक्ष्य है।

कर्त्तव्य सूचना पत्र

भारत के गौरव की वृद्धि और उसकी राजनीतिक उन्नति रिपब्लिक हिन्द का विशेष लक्ष्य होगा। संसार भर के नये से  नये समाचार इसमें रहेंगे। दिन-दिन संसार की बदलती हुई दशाओं में नये-नये विचार उपस्थित करने की आवश्यकता होगी। भूत घटनाओं से शिक्षा-लाभ कर हमको भविष्य के लिए अपने हिन्द को गणतंत्र बनाए रखना है। हम लोग पूर्व के गौरव के गान गाते हैं और भविष्य के स्वप्न देखा करते हैं। हमारा हिन्द सर्वथा गणतंत्र बना रहे, इसलिए हम “रिपब्लिक हिन्द नाम से आप लोगों के सम्मुख उपस्थित हैं।

उद्देश्य

  1. भारत के गौरव की वृद्धि और उसकी राजनीतिक उन्नति।
  2. देश के लिए सर्व प्रकार से स्वतंत्रता हासिल करना होगा। हम हर बात में स्वतंत्र होना चाहते हैं।
  3. हमारा मूल मंत्र यही है कि देश की गौरव वृद्धि हो और देशवासियों में स्वाभिमान संचार हो। यह स्वाभिमान मातृभूमि की उपासना करने से मिलता है। जब हम में आत्मगौरव होगा तो अन्य लोग भी हमको आदर तथा सम्मान की दृष्टि से देखेंगे। हमारा प्रयत्न होगा कि भारत और भारतीयों का नाम संसार में आदर के साथ लिया जाय।
  4. हमें जाति-जाति, धर्म-धर्म और देश-देश में किसी प्रकार का झगड़ा-वैमनस्य पसंद नहीं। यथासंभव हम यत्न करेंगे कि व्यक्ति-विशेषों पर कटाक्ष न हो। केवल उनके विचारों की ही समीक्षा-परीक्षा हो। किसी के चरित्र तथा रहस्य-जीवन की बातों पर प्रकाश नहीं। किसी का व्यक्तिगत आचरण जब सार्वजनिक कल्याण का बाधक होगा तो उसका प्रतिकार हमको करना ही होगा। हमारा विशेष प्रयत्न होगा कि किसी व्यक्ति के ऊपर कटु वाक्य का प्रयोग न हो और न किसी जाति विशेष से द्वेष फैलाया जाय।
  5. हम अपना घर सँभालने उठे हैं, दूसरों का ढहाने नहीं। अपना घर ठीक करने में कोई बाधा डालेगा तो उसके प्रतिकार का यत्न अवश्य करना होगा।
  6. हमारी शिक्षा नीति उस प्रणाली के पक्ष में होगी जिससे मानसिक उन्नति होगी- वाणिज्य, व्यवसाय, कृषि आदि जिनसे आर्थिक उन्नति होगी। हम देशकाल के अनुकूल उचित शिक्षा के नितान्त पक्षपाती हैं। देश में सर्वव्यापक और उपयुक्त शिक्षा हो जिससे लोग अपने कर्तव्य और अधिकार को पूरी तौर से समझें। कर्तव्य पालन में अपने अधिकार न भूलें और अधिकारों पर अड़े रहते हुए भी अपने कर्तव्य से कदापि विमुख न हों। शिक्षा संबंधी सब प्रकार के विचारों के लिए स्थान सदा खुला रहेगा और उच्च माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षाओं के प्रस्ताव हम सहर्ष प्रकाशित करेंगे। हमारा यह उद्देश्य रेहगा कि शिक्षा ऐसी दी जाय जिससे शिक्षित लोगों को उचित रोजगार मिलने में कठिनाई न हो और वे अपना जीवन आनन्द और गौरव के साथ काट सकें।
  7. हमारी आर्थिक नीति का आधार व्यापार, व्यवसाय, कृषि आदि की उन्नति होगी जिस पर रिपब्लिक हिन्द सदा जोर देगा और इनको बढ़ाने के उपायों को बराबर बताने का यत्न करेगा। हम जानते हैं कि बिना धन के और बिना सम्पति के हमारा राष्ट्रीय जीवन निष्फल है। हमें अपना देश फिर धन-धान्य से पूरा करना है और प्रत्येक नर-नारी को पर्याप्त अन्न, वस्त्र और उचित आमोद-प्रमोद की सामग्री देनी है।
  8. सामाजिक और धार्मिक नीति में भी हम स्वतंत्रता चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि किसी व्यक्ति पर उसका समाज अनुचित दबाव डाले या उससे ईर्ष्या कर उसे नाश करने का यत्न करे। हमारी हार्दिक इच्छा है कि हिन्दू, मुसलमान, ईसाई और अन्य अनेक मतमतान्तर जो हमारे देश में हैं उनके अनुयायी परस्पर स्नेह से रहें। वे अपना मत किसी दूसरे पर जबरदस्ती न लादें। हम चाहते हैं कि अपनी-अपनी रीति-रस्मों का अनुसरण करते हुए एक दूसरे के विश्वासों का आदर करें और निष्कारण एक-दूसरे को कष्ट न दें। हम सबको भारत की उन्नति और राष्ट्र का वैभव ही सर्वश्रेष्ठ धर्म मानना चाहिए। अपने पन्थ विशेष अनुसरण में यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी प्रकार से इस महाधर्म के प्रादुर्भाव में कोई बाधा न पड़े।
  9. इस प्रकार की स्वतंत्रता तथा एकता की सिद्धि के अतिरिक्त समाज और धर्म की तफसीलों पर प्रकाश करना चाहेंगे। उनको पत्र में स्थान अवश्य मिलेगा पर सम्पादकीय नीति सामाजिक और धार्मिक अर्थात् जाति  और पंथ संबंधी झगड़ों में कुछ नहीं है।
  10. इस विषय में हमारे संचालकों ने अपने कर्तव्य सूचना पत्र में लिखा है कि सामाजिक और धार्मिक विषयों में सब प्रकार के मतों को इसमें स्थान मिलेगा। इस निमित्त पाठकों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा गया है कि लेख-शैली, विचार गाम्भीर्य और सौम्य भाषा की प्रणाली की रक्षा करते हुए सब प्रकार के नये पुराने मतों को रिपब्लिक हिन्द में स्थान दिया जायेगा। इस बात का विशेष प्रयत्न किया जाएगा कि विविध मतों के  प्रकाशन में राग-द्वेष प्रेरित दलबन्द-तटबन्दी न होने पाय।
  11. प्रत्येक देश में आभ्यन्तरिक शान्ति हो अर्थात स्त्री-पुरुष, पूँजीवाले और श्रमजीवी, हाकिम और महकूम, अमीर और गरीब आदि में परस्पर उचित प्रकार से कर्त्तव्य और अधिकार, काम और दाम, मेहनत और इनाम, एषणाओं और पारितोषिकों का बँटवारा हो। सारांश यह है कि ऐसा न हो कि  कतिपय लोगों को सब कुछ मिले और बहुतों को कुछ भी नहीं। ऐसा होने से ईर्ष्या और द्वेष बढ़ता है और समाज के अभ्यान्तर युद्ध खड़ा हो जाता है और सुख-शान्ति का नाश होता है।
  12. हमारा पोर्टल इस लक्ष्य से भी सहमत है और यह चाहता है कि मनुष्य समाज के पुनर्व्यूहन में ऐसा उचित प्रबंध हो कि किसी को उचित से बहुत अधिक और दूसरों को साधारण आवश्यकता से भी बहुत कम न मिले। संभव है इस कार्य में हमारे देश के पुरातन विचारवालों से आधुनिक संसार को बहुत कुछ सहायता मिल सके। यह पोर्टल संसार में प्रवेश करते समय भारत के पूर्व आदर्शों को स्मरण रखते हुए भारत के भविष्य के सर्वांग सुन्दर और वास्तविक आभूषणों से अलंकृत करने में उचित भाग लेने की आशा करते हुए, वर्तमान समय में भारत की मान-मर्यादा और उसकी गौरव-वृद्धि करने कराने का बीड़ा उठाता है।

वन्दे मातरम्… जय हिन्द!

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